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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय की डायरी में 25 दिन के दुष्प्रचार का जिक्र

by on | 2026-08-28 11:58:37

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय की डायरी में 25 दिन के दुष्प्रचार का जिक्र

अयोध्या | बेबाक24 न्यूज़

रामजन्मभूमि परिसर में चढ़ावे की राशि से जुड़े चोरी के मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय की डायरी से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। डायरी में उन्होंने दावा किया है कि घटना सामने आने के बाद करीब 25 दिनों तक लगातार दुष्प्रचार किया गया। बाद में आरोपों का केंद्र मंदिर प्रकरण से हटकर उनके निजी जीवन तक पहुंच गया, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक गतिविधियों से दूरी बना ली।

11 जून की बैठक से तेज हुआ विवाद

डायरी के अनुसार, 11 जून की रात लखनऊ में ट्रस्ट के पांच सदस्यों की बैठक हुई थी। इसमें प्रकरण की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति गठित करने पर विचार किया गया। इसी दौरान समिति के प्रस्ताव का एक प्रारूप गलती से चंपत राय के मोबाइल के स्टेटस पर भी लग गया।

कुछ मिनट बाद उसे हटा दिया गया, लेकिन तब तक कई लोगों ने उसे देख लिया था। इसके बाद प्रारूप के बाहर आने और अगले दिन प्रकाशित होने से विवाद और बढ़ गया। 12 जून को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विशेष जांच दल से जांच कराने का अनुरोध किया गया।

व्यक्तिगत आरोपों के बाद मौन धारण किया

चंपत राय की डायरी में दर्ज विवरण के मुताबिक, शुरुआती दिनों में विवाद मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी तक सीमित था। बाद में आरोपों और प्रचार का रुख उनके व्यक्तिगत जीवन की ओर मुड़ गया। इससे वह मानसिक रूप से आहत हुए।

उन्होंने 24 जून से मंदिर परिसर में जाना और पत्रकारों से मिलना बंद कर दिया। डायरी में उन्होंने पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ चलाए गए सुनियोजित अभियान के तौर पर महसूस किए जाने का भी उल्लेख किया है।

पहले ही दिन हुई थी चार घंटे पूछताछ

डायरी के मुताबिक, 15 जून को गठित विशेष जांच दल के तीन सदस्य रामजन्मभूमि परिसर पहुंचे और चंपत राय से करीब चार घंटे तक अलग से पूछताछ की। जांच टीम ने घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज और आरोपियों से प्राप्त स्वीकारोक्ति पत्रों की मूल प्रतियां भी अपने कब्जे में लीं।

इसके बाद डॉक्टर अनिल मिश्र और गोपाल राव से भी पूछताछ की गई। कुछ मौकों पर दोनों को चंपत राय के साथ बैठाकर भी सवाल किए गए।

अप्रैल में भी चोरी के आरोप में कर्मचारी हटाया गया था

डायरी में दर्ज घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी का मामला 4 जून की घटना से पहले भी सामने आया था। अप्रैल में एक कर्मचारी को कथित चोरी के आरोप में परिसर से हटाया गया था।

उससे पूछताछ के दौरान दो गणना कर्मियों से भी जानकारी ली गई। दोनों के बयान अलग-अलग थे। एक ने कर्मचारी को चोरी के कारण हटाए जाने की बात कही, जबकि दूसरे के मुताबिक उसने बैंक के एक व्यक्ति से चोरी की शिकायत की थी और उसी कारण कार्रवाई हुई।

इन विरोधाभासी बयानों ने इस सवाल को जन्म दिया कि क्या चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की शिकायतें जून की घटना से पहले से चल रही थीं।

आठ जून तक धन बरामद करने का दावा

डायरी के अनुसार, 5 जून की रात से 8 जून तक लगातार पूछताछ और धन की बरामदगी का सिलसिला चला। ट्रस्ट स्तर पर अलग-अलग लोगों से पूछताछ की गई और चढ़ावे की राशि का एक हिस्सा वापस भी बरामद किया गया।

8 जून को डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों और चंपत राय की मौजूदगी में भी पूछताछ हुई।

‘हमारे बीच भेदिया कौन?’

डायरी में इस बात का भी उल्लेख है कि घटना की जानकारी समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव तक पहुंचने के बाद चंपत राय के मन में सवाल उठा कि मंदिर परिसर के भीतर की जानकारी बाहर कैसे पहुंची।

उन्होंने कथित तौर पर सवाल किया कि “हमारे बीच भेदिया कौन है?”

डायरी के अनुसार, 4 जून की रात ट्रेन से अयोध्या रवाना होने के दौरान उन्हें सूचना मिली थी कि हुंडी गणना कक्ष के शौचालय में नोटों की गड्डी मिली है। करीब 2.25 लाख रुपये मिलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई।

अगले दिन सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और शाम की दूसरी पाली में काम करने वाले तीन गणना कर्मियों पर संदेह जताया गया। बाद में उनसे पूछताछ की गई और उनके घरों से अलग-अलग रकम बरामद किए जाने का दावा किया गया।

पुराने घटनाक्रम ने खड़े किए नए सवाल

चंपत राय की डायरी में दर्ज घटनाओं से अब यह सवाल उठ रहा है कि चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी केवल 4 जून की एक घटना थी या उससे पहले से भी ऐसी शिकायतें सामने आती रही थीं।

हालांकि, पूरे मामले की अंतिम स्थिति विशेष जांच दल की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। फिलहाल डायरी में दर्ज घटनाक्रम ने मंदिर की चढ़ावा व्यवस्था, जांच प्रक्रिया और अंदरूनी सूचनाओं के बाहर पहुंचने को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।



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