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नेपाल में 162 मौतें, सैकड़ों लापता; 100 मीटर ऊंची बाढ़ ने मचाई तबाही

by admin@bebak24.com on | 2026-08-27 12:04:25

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नेपाल में 162 मौतें, सैकड़ों लापता; 100 मीटर ऊंची बाढ़ ने मचाई तबाही

काठमांडू | बेबाक24 न्यूज़

नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अब तक 162 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। रसुवा जिले के तिमुरे और आसपास के इलाकों में बाढ़ ने घरों, पुलों, सड़कों और जलविद्युत परियोजनाओं को बहा दिया। इस आपदा में भारतीयों समेत कई विदेशी नागरिक भी फंसे या लापता बताए जा रहे हैं।

100 मीटर ऊंची पानी की दीवार ने मचाई तबाही

रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना के मुताबिक, अचानक पानी और मलबे की विशाल दीवार तिमुरे बाजार की ओर बढ़ी। उन्होंने इसे करीब 100 मीटर ऊंची लहर जैसा बताया। देखते ही देखते बाजार और आसपास की कई संरचनाएं बाढ़ की चपेट में आ गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई परिवारों के सदस्य मलबे और तेज बहाव में बह गए। राहतकर्मियों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

162 शव बरामद, 700 से ज्यादा लोगों की तलाश

नेपाल सरकार के अनुसार अलग-अलग प्रभावित जिलों से अब तक 162 शव बरामद किए गए हैं। चितवन में सबसे अधिक 64 मौतें दर्ज हुई हैं। इसके अलावा धाडिंग में 27, नवलपरासी पूर्व में 26, गोरखा में 20, तनहूं में 9, नुवाकोट में 12 और रसुवा में 2 शव मिले हैं।

करीब 700 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हैं।

बाढ़ के पीछे हिमस्खलन की आशंका

शुरुआती जांच में बाढ़ के पीछे हिमस्खलन को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बताया गया है कि तिब्बत क्षेत्र में हिमस्खलन के बाद ल्हेंडे नदी का रास्ता प्रभावित हुआ और अचानक भारी मात्रा में पानी व मलबा नीचे की ओर आया। इसके बाद भोटेकोशी नदी में तेज बाढ़ आ गई।

नेपाल के विदेश मंत्री के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आने के कुछ ही मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली थी। इससे ग्लेशियर या हिमस्खलन से जुड़ी अचानक बाढ़ की आशंका और मजबूत हुई है।

पुल और सड़कें भी बहीं

बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। 14 झूला पुल, 25 परिवहन पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क बहने की जानकारी सामने आई है। कई जलविद्युत परियोजनाएं और बैंक शाखाएं भी बाढ़ की चपेट में आई हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और दूरसंचार सेवाएं बाधित होने से लापता लोगों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।

कैलाश मानसरोवर यात्री भी फंसे

नेपाल-तिब्बत सीमा की ओर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे भारतीय यात्रियों का एक दल भी बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर है। कोलकाता से गया 32 सदस्यीय दल रसुवागढ़ी पहुंचा था, लेकिन बाढ़ के बाद उसके सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाया। राहत एजेंसियां और संबंधित प्रशासन उनकी स्थिति का पता लगाने में जुटे हैं।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर हादसे पर संवेदना जताई और हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। भारत ने राहत सामग्री भी भेजी है और बचाव प्रयासों में सहयोग की पेशकश की है।

भारत के अलावा संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमेरिका और कई अन्य देशों ने भी नेपाल के साथ एकजुटता जताई है।

बिहार में भी बढ़ी निगरानी

नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बाढ़ के बाद बिहार में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। गंडक नदी के जलप्रवाह पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संवेदनशील जिलों में प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

बेबाक24 नजर: नेपाल की इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, हिमस्खलन और समय पर चेतावनी तंत्र की कमजोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब राहत और बचाव के साथ यह भी जरूरी है कि नेपाल और पड़ोसी देश सीमा पार आपदा की सूचना साझा करने और पूर्व चेतावनी व्यवस्था को और मजबूत करें।



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