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एफएमजीई ग्रेस मार्क्स पर फैसला: जांच में नहीं मिला ठोस आधार

by admin@bebak24.com on | 2026-08-26 13:25:13

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एफएमजीई ग्रेस मार्क्स पर फैसला: जांच में नहीं मिला ठोस आधार

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा यानी एफएमजीई जून 2026 में कुछ अभ्यर्थियों की ओर से मांगे जा रहे ग्रेस मार्क्स को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड आयुर्विज्ञान की विशेषज्ञ समिति ने अपनी समीक्षा पूरी कर ली है। समिति को परीक्षा के परिणाम पर किसी बड़े प्रतिकूल प्रभाव का वस्तुनिष्ठ या सांख्यिकीय प्रमाण नहीं मिला। ऐसे में मौजूदा परिणाम में बदलाव या अतिरिक्त अंक देने का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया।

वीडियो सवालों पर भी की गई जांच

कुछ अभ्यर्थियों ने वीडियो आधारित 14 प्रश्नों को लेकर आपत्ति जताई थी। इसके अलावा कुछ परीक्षा केंद्रों पर गर्मी और वेंटिलेशन की समस्या की शिकायत भी सामने आई थी। विशेषज्ञ समिति ने प्रश्नपत्र की कठिनाई, वीडियो आधारित प्रश्नों, केंद्रों की परिस्थितियों और अभ्यर्थियों के प्रदर्शन समेत कई पहलुओं की समीक्षा की।

समिति के अनुसार, वीडियो आधारित प्रश्नों को शामिल करने या हटाने की स्थिति में परीक्षा का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत लगभग 12.8% ही रहा। इससे परिणाम पर इन प्रश्नों के किसी महत्वपूर्ण प्रभाव का प्रमाण नहीं मिला।

दोनों पालियों के प्रदर्शन का भी विश्लेषण

समिति ने दोनों पालियों के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन की भी समीक्षा की। जांच के मुताबिक पहली पाली के 78% और दूसरी पाली के 88% अभ्यर्थियों ने पूरा प्रश्नपत्र हल किया। वीडियो आधारित प्रश्नों में भी अभ्यर्थियों का प्रदर्शन उनके समग्र प्रदर्शन की तुलना में बेहतर पाया गया।

परीक्षा केंद्रों की शिकायतों पर भी गौर

जिन केंद्रों से अधिक गर्मी और वेंटिलेशन की शिकायतें मिली थीं, वहां के परिणामों का अलग से विश्लेषण किया गया। समिति को इन केंद्रों के प्रदर्शन में ऐसा महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि केंद्र की परिस्थितियों ने परीक्षा परिणाम को प्रभावित किया।

ग्रेस मार्क्स को लेकर नियमों की भी समीक्षा

विशेषज्ञ समिति ने ग्रेस या क्षतिपूर्ति अंक देने से जुड़े कानूनी और नियामकीय पहलुओं की भी जांच की। रिपोर्ट में 2004 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया गया है, जिनके तहत परीक्षा में इस तरह के अंकों के इस्तेमाल पर सीमाएं निर्धारित हैं।

भविष्य की परीक्षाओं के लिए बदलाव की सिफारिश

हालांकि जून 2026 के परिणाम में बदलाव की सिफारिश नहीं की गई है, लेकिन समिति ने आगामी परीक्षाओं को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें मल्टीमीडिया आधारित प्रश्नों की पूर्व जानकारी देना, परीक्षा केंद्रों की सुविधाएं और आपात व्यवस्था मजबूत करना तथा अभ्यर्थियों को उनके उत्तर और प्राप्त अंकों की अधिक पारदर्शी जानकारी देना शामिल है।

समिति ने एफएमजीई साल में कम से कम 3 बार आयोजित करने और परीक्षा शुल्क की समीक्षा करने का सुझाव भी दिया है।

बेबाक24 निष्कर्ष: विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा प्रमाण एफएमजीई जून 2026 के परिणाम में बदलाव या ग्रेस मार्क्स देने को उचित नहीं ठहराते। हालांकि, परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं और प्रश्नपत्र के स्वरूप में सुधार के सुझाव बताते हैं कि अभ्यर्थियों की शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया है।



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