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जयशंकर-लावरोव की लंबी वार्ता, पुतिन तक पहुंचा मोदी का संदेश

by admin@bebak24.com on | 2026-08-25 13:48:36

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जयशंकर-लावरोव की लंबी वार्ता, पुतिन तक पहुंचा मोदी का संदेश

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा के दौरान भारत-रूस संबंधों को लेकर कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय परिस्थितियों और वैश्विक चुनौतियों पर बातचीत की। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी संदेश भी सौंपा।

जयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब भारत और रूस के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग और उच्च तकनीक के क्षेत्रों में साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर जोर है।

लावरोव से कई मुद्दों पर हुई लंबी बातचीत

जयशंकर और लावरोव के बीच हुई बैठक में भारत-रूस संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय संकटों, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार साझा किए।

जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

पुतिन को सौंपा प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान जयशंकर ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी संदेश सौंपा। उन्होंने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में हुई चर्चाओं और दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रगति की जानकारी भी दी।

बैठक में व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विशेष महत्व दिया गया। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई।

एससीओ और ब्रिक्स पर भी बनी बात

जयशंकर ने पुतिन को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी आगामी एससीओ शिखर सम्मेलन में उनसे मुलाकात को लेकर उत्सुक हैं। इसके साथ ही भारत में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भी रूस को आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई।

पुतिन ने जयशंकर का स्वागत किया और प्रधानमंत्री मोदी को अपनी शुभकामनाएं देने को कहा। उन्होंने एससीओ शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात को लेकर भी उम्मीद जताई।

27वें अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में भी अहम चर्चा

रूस दौरे के दौरान जयशंकर ने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की।

इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक संबंधों की समीक्षा की गई। ऊर्जा, उर्वरक आपूर्ति, परमाणु क्षेत्र और उच्च तकनीक में आगे सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

भारत-रूस संबंधों के लिए क्यों अहम है दौरा?

जयशंकर की रूस यात्रा केवल उच्चस्तरीय मुलाकातों तक सीमित नहीं रही। इसमें भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने, रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मंचों पर समन्वय बढ़ाने का स्पष्ट प्रयास दिखाई दिया।

बेबाक24 निष्कर्ष:
जयशंकर की मॉस्को यात्रा से यह संकेत मिला है कि भारत रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्रों तक ले जाना चाहता है। एससीओ और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच तालमेल आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकता है।



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