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जापान में गोयल का दो टूक संदेश: निवेश करें, भारत की शर्तों पर

by on | 2026-08-25 13:29:25 Last Updated by admin@bebak24.com on

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जापान में गोयल का दो टूक संदेश: निवेश करें, भारत की शर्तों पर

टोक्यो | बेबाक24 न्यूज़

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के जापान दौरे में भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के साथ भारतीय हितों पर भी जोर साफ दिखाई दिया। टोक्यो में जापानी उद्योग जगत से बातचीत के दौरान गोयल ने भारत में निवेश का न्योता दिया, लेकिन साथ ही बाजार पहुंच, इस्पात आयात और व्यापारिक मांगों को लेकर जापानी कंपनियों से कई सीधे सवाल भी किए।

उनका संदेश स्पष्ट रहा—भारत निवेश और साझेदारी के लिए तैयार है, लेकिन अपनी औद्योगिक प्राथमिकताओं और हितों से समझौता नहीं करेगा।

चीन पर इशारा, भारत को बताया भरोसेमंद ठिकाना

जापानी उद्योग प्रतिनिधियों के सामने गोयल ने भारत को डाटा सेंटर और तकनीकी निवेश के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत में बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और कारोबारी भरोसे को प्राथमिकता दी जाती है।

उन्होंने चीन का नाम लिए बिना ऐसे कारोबारी माहौल पर भी तंज किया, जहां सफल कारोबारी के भविष्य को लेकर अनिश्चितता हो सकती है। गोयल ने कहा कि भारत में निवेशकों को बौद्धिक संपदा की चोरी या अचानक गायब हो जाने जैसी आशंकाओं से जूझना नहीं पड़ेगा।

गोयल ने भारत को किसी दूसरे देश का विकल्प मानने के बजाय स्वतंत्र और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दूसरे देशों की तकनीक की नकल करके उत्पाद तैयार करने के बजाय अपनी क्षमता और नवाचार पर भरोसा करता है।

कंपनियों की शिकायत सुनी, मौके पर समाधान का दावा

कारोबार सुगमता को लेकर जापानी कंपनियों की चिंताओं पर गोयल ने कहा कि सरकार उचित मांगों पर तेजी से फैसले लेने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर उपकरण और वाहन कलपुर्जे क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की समस्याओं पर उसी दिन बातचीत की गई।

गोयल के मुताबिक, सरकार अगले 2 महीने में आवश्यक नियमों में बदलाव और नए प्रावधानों पर काम कर सकती है, ताकि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को अनावश्यक दिक्कत न हो।

हालांकि उन्होंने साफ किया कि हर मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। खास तौर पर अनुचित रूप से सस्ते आयात की अनुमति देने जैसी मांगों पर सरकार अपने घरेलू उद्योग के हितों से पीछे नहीं हटेगी।

इस्पात पर जापानी कंपनियों को ही घेरा

जापानी इस्पात उद्योग की ओर से भारत के सुरक्षा शुल्क में राहत की मांग पर गोयल ने कई देशों के शुल्क का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में इस्पात पर 50 फीसदी तक सुरक्षा शुल्क लगाया गया है, जबकि भारत में यह दर 12 फीसदी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जापानी कंपनियां भारत में इस्पात खरीदने के बजाय अन्य देशों से खरीदारी को प्राथमिकता क्यों देती हैं, जबकि भारतीय इस्पात कीमत और गुणवत्ता के लिहाज से प्रतिस्पर्धी है।

गोयल ने कहा कि यदि जापानी कंपनियां भारत से खरीद बढ़ाती हैं तो दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर हो सकता है। शुल्क से जुड़ी शिकायतों के लिए उन्होंने स्वतंत्र प्राधिकरण के समक्ष जाने की सलाह दी।

सेमीकंडक्टर से ऊर्जा तक भारत ने रखा रोडमैप

गोयल ने जापानी निवेशकों के सामने भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की योजनाओं का भी खाका रखा। उन्होंने बताया कि सेमीकॉन 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय तय किया गया है। पहले चरण में 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और इनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का उल्लेख किया गया।

ऊर्जा क्षेत्र में उन्होंने भारत की सौर क्षमता बढ़ने का उदाहरण दिया। उनके अनुसार वर्ष 2014 में करीब 2 गीगावाट की सौर क्षमता अब 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और इसे अगले 3 वर्षों में 250 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है।

डाटा सेंटर और कर छूट पर भी जोर

भारत में डाटा सेंटर निवेश को आकर्षित करने के लिए गोयल ने स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता और दीर्घकालिक प्रोत्साहनों को रेखांकित किया। उनके अनुसार भारत करीब 7 से 8 अमेरिकी सेंट प्रति यूनिट की दर पर चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक सेवाओं के लिए डाटा सेंटर स्थापित करने वाली कंपनियों को वर्ष 2047 तक कर छूट का लाभ दिया गया है।

भारत-जापान व्यापार में नया संतुलन बनाने की कोशिश

गोयल के जापान दौरे में निवेश आकर्षित करने के साथ व्यापार असंतुलन दूर करने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। भारत चाहता है कि जापानी कंपनियां यहां केवल उत्पादन इकाइयां न लगाएं, बल्कि भारतीय कंपनियों और उत्पादों के लिए जापानी बाजार भी अधिक खोलें।

बेबाक24 निष्कर्ष

पीयूष गोयल की जापान यात्रा का संदेश सिर्फ “भारत में निवेश कीजिए” तक सीमित नहीं रहा। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह विदेशी निवेश का स्वागत करता है, लेकिन बदले में तकनीक, उत्पादन, रोजगार और बाजार पहुंच में ठोस साझेदारी चाहता है। जापानी कंपनियों के लिए भारत का संदेश अब निवेश के साथ पारस्परिक व्यापार और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का है।



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