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मायावती का आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर हमला, बोलीं- सरकारें संरक्षण न दें; राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

by admin@bebak24.com on | 2026-08-23 10:21:40

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मायावती का आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर हमला, बोलीं- सरकारें संरक्षण न दें; राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए संविधान में दिए गए आरक्षण के विरोध में हुए प्रदर्शनों को लेकर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकारों से अपील की कि आरक्षण विरोधी तत्वों को किसी भी तरह का संरक्षण या शरण नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों को आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर सस्ती राजनीति से बचने की नसीहत दी।

आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम न हो

मायावती ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था उन समुदायों के लिए की गई है जो लंबे समय तक जातिगत भेदभाव, शोषण और सामाजिक असमानता का सामना करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए जिससे समानता पर आधारित समाज और संवैधानिक मूल्यों को नुकसान पहुंचे।

बसपा प्रमुख ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए जातिवाद को खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में समानता और भाईचारा मजबूत करना ही वास्तविक देशहित है।

आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग पर सवाल

मायावती ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि गरीबी दूर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पहले से कई योजनाएं संचालित हैं।

उनके अनुसार जरूरत यह है कि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके।

उन्होंने दावा किया कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कमियों के कारण जरूरतमंद लोगों तक पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता।

सरकारों पर व्यवस्था ठीक से लागू न करने का आरोप

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और जातिगत पूर्वाग्रह से प्रभावित सरकारी व्यवस्था के कारण आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का अपेक्षित लाभ पूरी तरह से लोगों तक नहीं पहुंच पाया।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को आज भी गरीबी, भेदभाव, शोषण और सामाजिक अत्याचार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

‘आरक्षण विरोधी तत्वों को संरक्षण न दें’

मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से स्पष्ट अपील की कि आरक्षण का विरोध करने वाले तत्वों को किसी भी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए।

उन्होंने राजनीतिक दलों और नेताओं से भी कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील सामाजिक विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

उनके मुताबिक, ऐसे मुद्दों पर सस्ती राजनीति समाज में तनाव बढ़ाने के बजाय समस्या को और जटिल करती है।

राहुल गांधी के धरने पर भी सवाल

मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने के बाहर धरने का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर कई घंटे थाने के बाहर बैठे, लेकिन उसी दौरान जंतर-मंतर पर आरक्षण खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि जाकर उनसे बातचीत करता नजर नहीं आया।

मायावती ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी या कांग्रेस के किसी नेता ने वहां जाकर प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास क्यों नहीं किया।

उन्होंने इसे कांग्रेस की आरक्षण संबंधी सोच पर सवाल खड़ा करने वाला रवैया बताया।

जंतर-मंतर पर लगातार बढ़ रही राजनीतिक हलचल

दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से आरक्षण व्यवस्था को लेकर अलग-अलग समूहों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के बीच मायावती का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब यह मुद्दा केवल आरक्षण की नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी विषय बन गया है।

बेबाक24 का नजरिया

आरक्षण भारत में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व से जुड़ा संवैधानिक विषय है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकारों की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ संवाद का रास्ता खुला रखना भी है। राजनीतिक दलों के लिए भी जरूरी है कि आरक्षण पर बहस तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर हो, न कि केवल चुनावी लाभ के लिए।



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