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धर्मेंद्र प्रधान बोले- ‘जेन ज़ी को गुमराह करने की कोशिश हुई’, संजय सिंह ने पूछा- ‘पेपर लीक हुआ या नहीं?’

by admin@bebak24.com on | 2026-08-09 16:18:19

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धर्मेंद्र प्रधान बोले- ‘जेन ज़ी को गुमराह करने की कोशिश हुई’, संजय सिंह ने पूछा- ‘पेपर लीक हुआ या नहीं?’

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल जेन ज़ी के युवा देश के बच्चे हैं और कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्हें आंदोलन के दौरान कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं थी। उन्होंने देश में युवाओं की बड़ी आबादी और उनकी आकांक्षाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि यही युवा आगे चलकर भारत को विश्व गुरु बनाने में भूमिका निभाएंगे।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल करीब 2 करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनके मुताबिक़, इन युवाओं की अपनी आकांक्षाएं हैं और उन्हें देश के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।

संजय सिंह ने उठाया पेपर लीक और छात्रों की मौत का मुद्दा

धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि अगर परीक्षा में पेपर लीक हुआ था और छात्रों की मौत हुई है, तो फिर युवाओं को ‘गुमराह’ किए जाने की बात कैसे कही जा सकती है?

संजय सिंह ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि पेपर लीक हुआ था या नहीं। उन्होंने आंदोलन से जुड़े 21 छात्रों की मौत का भी ज़िक्र किया और सवाल उठाया कि अगर ये दोनों बातें सही हैं तो छात्रों के आंदोलन को भटकाव बताने का सवाल ही क्यों उठता है।

जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर जारी है राजनीतिक बहस

जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान भर्ती परीक्षाओं और कथित अनियमितताओं समेत कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुआ था। आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई भी विवाद का विषय बनी और सरकार पर छात्रों की मांगों को लेकर सवाल उठे।

धर्मेंद्र प्रधान का ताज़ा बयान जहां आंदोलन में युवाओं की भूमिका और उन्हें कथित तौर पर गुमराह किए जाने की ओर इशारा करता है, वहीं संजय सिंह ने परीक्षा प्रक्रिया और छात्रों से जुड़े गंभीर सवालों को सामने रखा है।

दोनों नेताओं के बयानों से साफ है कि छात्र आंदोलन अब सिर्फ़ परीक्षा और भर्ती से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी बड़ा विषय बन चुका है।



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