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जेएनयू ने उमर ख़ालिद की किताब पर होने वाली परिचर्चा की अनुमति रद्द की, विश्वविद्यालय ने बताई वजह

by admin@bebak24.com on | 2026-08-09 16:18:12

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जेएनयू ने उमर ख़ालिद की किताब पर होने वाली परिचर्चा की अनुमति रद्द की, विश्वविद्यालय ने बताई वजह

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उमर ख़ालिद की किताब पर प्रस्तावित परिचर्चा के लिए दी गई अनुमति रद्द कर दी है। यह कार्यक्रम 10 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होना था।

जेएनयू प्रशासन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि कार्यक्रम के लिए एसएसए-1 सभागार की बुकिंग रद्द कर दी गई है। विश्वविद्यालय के मुताबिक़, कार्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह निर्णय लिया गया।

जेएनयू ने क्या कहा?

विश्वविद्यालय ने अपने बयान में कहा कि जेएनयू एक लोकतांत्रिक और विकेंद्रीकृत संस्थान है। प्रशासन के अनुसार, कार्यक्रम की अनुमति स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन की ओर से दी गई थी और उसी स्तर से कार्यक्रम रद्द करने की कार्रवाई भी की गई।

जेएनयू ने यह भी स्पष्ट किया कि 10 अगस्त को दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसी आधार पर सभागार की बुकिंग रद्द की गई।

किस कार्यक्रम का होना था आयोजन?

जेएनयू छात्रसंघ की ओर से 10 अगस्त को ‘विश्व के स्वदेशी लोगों के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर परिचर्चा आयोजित करने की घोषणा की गई थी।

इसमें उमर ख़ालिद की पुस्तक ‘फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज़- आदिवासी हिस्ट्रीज़ एंड द पॉलिटिक्स ऑफ़ पावर’ पर चर्चा होनी थी।

कार्यक्रम में प्रोफेसर प्रभु महापात्र, प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, हर्ष मंदर और बनोज्योत्सना लाहिड़ी समेत कई वक्ताओं के शामिल होने की बात कही गई थी।

कौन हैं उमर ख़ालिद?

उमर ख़ालिद सितंबर 2020 से जेल में हैं। उन पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े मामले में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ 2 प्राथमिकी दर्ज की हैं। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और आरोप सिद्ध होना अभी बाकी है।

कार्यक्रम रद्द होने के बाद सवाल

जेएनयू की ओर से कार्यक्रम रद्द करने की वजह के तौर पर कार्यक्रम की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गई है। विश्वविद्यालय ने इसे किसी वैचारिक या राजनीतिक कारण से जोड़े जाने की बात अपने बयान में नहीं कही है।

वहीं, उमर ख़ालिद की किताब पर प्रस्तावित परिचर्चा की अनुमति रद्द होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अकादमिक चर्चा और संस्थागत अनुमति की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज़ होने की संभावना है।



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