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आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह पर ओवैसी के सवाल, बोले- छात्रों को पीएम मोदी के सामने सिर झुकाने के निर्देश दिए गए

by admin@bebak24.com on | 2026-08-09 16:13:16

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आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह पर ओवैसी के सवाल, बोले- छात्रों को पीएम मोदी के सामने सिर झुकाने के निर्देश दिए गए

नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने दावा किया है कि समारोह से पहले आईआईटी दिल्ली के छात्रों को प्रधानमंत्री से मिलने के दौरान अपनी गर्दन झुकाकर रखने और वैदिक मंत्रों के दौरान खड़े होने के निर्देश दिए गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम को लेकर ओवैसी ने पत्रकारों से बातचीत में कथित निर्देशों पर सवाल उठाए।

छात्रों को सिर झुकाने के निर्देश देने का आरोप

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मीडिया में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली के छात्रों को प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान अपनी गर्दन कितनी झुकाकर रखनी है, इस बारे में भी निर्देश दिए गए थे।

ओवैसी ने कहा कि अगर किसी छात्र को किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के सामने शिष्टाचार के तहत व्यवहार करने के लिए कहा जाता है, तो यह अलग बात है। लेकिन उनके मुताबिक, छात्रों को विशेष रूप से सिर या गर्दन झुकाने के निर्देश देना सवाल खड़े करता है।

वैदिक मंत्रों को लेकर भी उठाया सवाल

ओवैसी ने समारोह के दौरान वैदिक मंत्रों के पाठ को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका दावा है कि छात्रों से कहा गया था कि जब वैदिक मंत्र पढ़े जाएंगे, तब सभी को खड़ा होना होगा।

उन्होंने इसे संविधान में दिए गए धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के संदर्भ में सवालों के घेरे में रखा।

ओवैसी ने कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धार्मिक गतिविधि को लेकर स्पष्ट संवैधानिक सीमाएं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की बात करता है और शिक्षण संस्थानों में किसी भी कदम को इन संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।

हालांकि, इन कथित निर्देशों को लेकर आईआईटी दिल्ली या केंद्र सरकार की ओर से ऐसी कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की बात इस रिपोर्ट में नहीं कही गई है। इसलिए छात्रों को दिए गए कथित निर्देशों और उनकी प्रकृति को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक पक्ष का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

पीएम मोदी के भाषण में बाबा बागेश्वर का जिक्र

दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान बाबा बागेश्वर का भी जिक्र किया।

उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यक्रम में मौजूद सभी छात्र भले ही मंच के सामने बैठे हों, लेकिन उनके मन में कुछ और भी चल रहा होगा। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन छात्रों के मन में क्या चल रहा है, यह कुछ हद तक समझा जा सकता है।

प्रधानमंत्री के इस बयान को लेकर भी सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

मामला सिर्फ़ एक कार्यक्रम का नहीं

ओवैसी के आरोपों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि देश के प्रमुख सरकारी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में आयोजित औपचारिक कार्यक्रमों में संवैधानिक मर्यादा, संस्थागत स्वायत्तता और धार्मिक प्रतीकों के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाना चाहिए।

वहीं, दूसरी तरफ़ यह भी जरूरी है कि सामने आए आरोपों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच आधिकारिक तथ्यों को अलग किया जाए।

फिलहाल मुख्य सवाल यही हैं कि क्या छात्रों को वास्तव में प्रधानमंत्री के सामने सिर या गर्दन झुकाने का कोई विशेष निर्देश दिया गया था? क्या वैदिक मंत्रों के दौरान खड़े होने के लिए औपचारिक निर्देश जारी हुए थे? और यदि ऐसे निर्देश दिए गए थे, तो उनका आधार और उद्देश्य क्या था?

इन सवालों के स्पष्ट जवाब संबंधित संस्थान या सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही सामने आ सकेंगे।



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