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आर्टिकल 370 हटने के 7 साल पूरे— महबूबा मुफ़्ती का केंद्र पर हमला; "अधिकारों की बहाली तक जारी रहेगी जद्दोजहद"

by admin@bebak24.com on | 2026-08-05 17:11:31

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आर्टिकल 370 हटने के 7 साल पूरे— महबूबा मुफ़्ती का केंद्र पर हमला; "अधिकारों की बहाली तक जारी रहेगी जद्दोजहद"

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने के 7 साल पूरे होने के अवसर पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। 5 अगस्त 2019 के फैसले के सात साल पूरे होने की पूर्व संध्या पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीर के लोग अपने अधिकारों, पहचान और जेलों में बंद स्थानीय निवासियों की रिहाई के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

महबूबा मुफ़्ती के मुख्य बिंदु और मांगें

महबूबा मुफ़्ती ने श्रीनगर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के 'सामान्य स्थिति' के दावों पर सवाल उठाए:

  • "हम ज़िंदा कौम हैं": महबूबा मुफ़्ती ने कहा, "जम्मू-कश्मीर के लोग मुर्दा नहीं हैं, हम ज़िंदा कौम हैं। पीडीपी और हमारी कौम मिलकर जम्मू-कश्मीर के मुद्दों, आर्टिकल 370 व 35A की बहाली और देश की विभिन्न जेलों में बंद हमारे लोगों की रिहाई के लिए जद्दोजहद करती रहेगी।"

  • सेना को सिविल इलाकों से हटाने की मांग: उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकार का दावा है कि कश्मीर में हालात पूरी तरह सामान्य हो चुके हैं, तो सेना को नागरिक क्षेत्रों से हटाकर वापस बैरकों में भेजा जाना चाहिए।

  • क्रॉस-एलओसी ट्रेड की बहाली: उन्होंने मुज़फ़्फ़राबाद और रावलाकोट व्यापार मार्गों को पुनः खोलने की मांग की, जिन्हें 2019 के घटनाक्रम के बाद बंद कर दिया गया था।

घाटी में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

समाचार एजेंसियों के अनुसार, 5 अगस्त की वर्षगांठ को देखते हुए पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है:

  • हाई-अलर्ट पर सुरक्षा बल: श्रीनगर, अनंतनाग और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पैरामिलिट्री बल और पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

  • डिजिटल और भौतिक निगरानी: किसी भी अप्रिय घटना, बंद या विरोध प्रदर्शन की कॉल को रोकने के लिए चेकपॉइंट्स (नाकों) पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।

बेबाक24 टेक

आर्टिकल 370 हटने के सात साल बाद भी जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बयानबाजी और जमीनी ध्रुवीकरण बना हुआ है। जहां केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे के विकास, पर्यटन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और उग्रवाद में कमी को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है, वहीं क्षेत्रीय राजनीतिक दल लोकतांत्रिक अधिकारों, स्थानीय रोजगार और नागरिक स्वतंत्रता की बहाली को प्राथमिक मुद्दा बनाए हुए हैं।



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