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सीजेपी प्रोटेस्ट का असर— जेन-ज़ी की बढ़ती ताकत के बीच आज 2,000 छात्रों से सीधा संवाद करेंगे RSS प्रमुख

by admin@bebak24.com on | 2026-08-05 16:53:01

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सीजेपी प्रोटेस्ट का असर— जेन-ज़ी की बढ़ती ताकत के बीच आज 2,000 छात्रों से सीधा संवाद करेंगे RSS प्रमुख

मुंबई : नीट पेपर लीक और कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए अभूतपूर्व छात्र आंदोलनों के बाद, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने युवाओं के बीच अपनी घटती पकड़ को लेकर आत्ममंथन शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 6 अगस्त मुंबई में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2,000 छात्रों के साथ एक अहम संवाद कार्यक्रम में शिरकत करने जा रहे हैं।

कार्यक्रम की रूपरेखा और अहमियत

नीट विवाद के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, संघ परिवार का युवाओं के साथ यह पहला बड़ा संपर्क अभियान है:

  • आयोजन स्थल और विषय: यह कार्यक्रम नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर, मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस के 15वें स्थापना वर्ष के मौके पर हो रहा है। इसका विषय है- 'भारतीय तरीके से दुनिया को एक सूत्र में बांधने में युवाओं की भूमिका'

  • प्रतिभागी: देश भर के 100 शहरों से आए 15 से 19 साल के करीब 2,000 हाई स्कूल स्टूडेंट्स ।

  • भागवत का नज़रिया: हाल ही में दिल्ली की एक जनसभा में भागवत ने स्पष्ट किया था कि नई पीढ़ी बिना सवाल किए निर्देश नहीं मानती, इसलिए उन पर 'आदेश' थोपने के बजाय 'विमर्श और तर्क' के ज़रिए संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है।

सीजेपी का तंज: "मजबूर हुए नेता"

छात्र आंदोलन की अगुवाई करने वाली सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस संवाद को युवाओं की जीत बताया है:

  • "नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते": दीपके ने कहा कि देश के युवाओं ने सत्ता को मजबूर कर दिया है। "पीएम मोदी को रात 11 बजे इंस्टाग्राम रील डालनी पड़ रही है और अब मोहन भागवत का भी जेन-ज़ी से बात करने का मन कर रहा है।"

  • यंग रिप्रेजेंटेशन की मांग: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 70-80 साल के नेताओं की बातचीत से जेन-ज़ी को कुछ खास हासिल नहीं होगा, युवाओं को असल में 'युवा प्रतिनिधित्व' चाहिए।

संघ और बीजेपी का 'डैमेज कंट्रोल' प्लान

विपक्ष और युवा आंदोलनों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए आरएसएस और बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है:

  • दूरी पाटने की कवायद: आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व ने स्वीकार किया है कि युवाओं से दूरी बढ़ रही है और एबीवीपी को इस बात की समीक्षा करने को कहा गया है कि विरोध प्रदर्शनों में वामपंथी संगठन कैसे हावी हो गए।

  • स्वतंत्रता दिवस आउटरीच: बीजेपी ने भारतीय जनता युवा मोर्चा को निर्देश दिए हैं कि वे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 2 सप्ताह का विशेष आउटरीच अभियान चलाएं, विशेषकर महाराष्ट्र में, जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं।

बेबाक24 टेक

यह स्पष्ट है कि हालिया छात्र आंदोलनों ने राजनीतिक विमर्श की धुरी बदल दी है। देश का नेतृत्व अब समझ चुका है कि इंटरनेट के युग में पली-बढ़ी पीढ़ी को एकतरफा भाषणों से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। मोहन भागवत का यह संवाद इस बात का प्रमाण है कि सत्ता और संगठन दोनों ही अब जेन-ज़ी के सवालों का जवाब 'आदेश' से नहीं, बल्कि 'तर्क' से देने की मज़बूरी महसूस कर रहे हैं।



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