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E20 पेट्रोल विवाद और डीपफ़ेक मामले में नितिन गडकरी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत

by admin@bebak24.com on | 2026-08-05 16:46:15

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E20 पेट्रोल विवाद और डीपफ़ेक मामले में नितिन गडकरी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत

मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार के खिलाफ सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे डीपफ़ेक और मानहानिकारक कंटेंट के मामले में एक बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने केंद्र सरकार के E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम से जोड़कर बनाई जा रही अभद्र पोस्ट्स, मीम्स और डीपफ़ेक तस्वीरों को तुरंत हटाने के लिए मेटा , एक्स और गूगल/यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट का सख्त रुख

जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की गाली-गलौज वाली सामग्री की कोई जगह नहीं होनी चाहिए:

  • अदालत की टिप्पणी: "वादी द्वारा प्रस्तुत सामग्री बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक है। ऐसी सामग्री का किसी भी सार्वजनिक मंच पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, जहां बच्चे भी इसे देख सकते हैं।"

  • इंटरमीडिएटरीज़ का बयान: सुनवाई के दौरान मेटा और गूगल ने आपत्तिजनक कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटाने पर सहमति जताई।

  • भविष्य के लिए व्यवस्था: कोर्ट ने कंपनियों को निर्देश दिया कि यदि गडकरी भविष्य में ऐसी किसी अन्य मानहानिकारक या डीपफ़ेक सामग्री की सूचना देते हैं, तो उसे बिना हर बार अदालत आए तुरंत हटाना होगा।

विवाद की पृष्ठभूमि और गडकरी की याचिका

नितिन गडकरी ने वकील संदीप एस. लड्डा के माध्यम से 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए यह सिविल मानहानि याचिका दायर की थी:

  • E20 पॉलिसी को लेकर निशाना: केंद्र सरकार की E20 नीति से व्यक्तिगत व आर्थिक लाभ कमाने के झूठे दावों और डीपफ़ेक वीडियो/रील्स के ज़रिए सोशल मीडिया पर 'गडकरी इज़ नेक्स्ट' जैसे मीम्स और अभियान चलाए जा रहे थे।

  • विपक्षी हमले और विरोध: MNS कार्यकर्ताओं द्वारा पेट्रोल पंपों पर प्रदर्शन और विपक्षी नेताओं की बयानबाज़ी के बीच सोशल मीडिया पर E20 नीति से जुड़े भ्रामक दावों की बाढ़ आ गई थी।

  • अपलोडर्स की पहचान: हाई कोर्ट ने टेक कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे उन यूज़र्स की विस्तृत जानकारी भी प्रदान करें जिन्होंने ये भ्रामक और मानहानिकारक डीपफ़ेक पोस्ट अपलोड किए हैं।

बेबाक24 टेक

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह आदेश डिजिटल युग में डीपफ़ेक और ऑनलाइन ट्रॉलिंग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है। नीतिगत आलोचना और व्यक्तिगत चरित्र हनन या डीपफ़ेक का इस्तेमाल करके नफ़रत फैलाने के बीच की रेखा को स्पष्ट करना अनिवार्य हो गया है। सोशल मीडिया कंपनियों को अपने एआई और मॉडरेशन फ़िल्टर्स को इतना मजबूत बनाना होगा ताकि किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को इस तरह नुकसान न पहुंचाया जा सके।



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