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नौकरी के नाम पर ₹4 लाख वसूलने का आरोप, बीएचयू VT के मानद प्रबंधक पद से प्रो. ब्रजभूषण ओझा की छुट्टी; प्रो. माधव जनार्दन को कमान

by on | 2026-08-04 22:21:01

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नौकरी के नाम पर ₹4 लाख वसूलने का आरोप, बीएचयू VT के मानद प्रबंधक पद से प्रो. ब्रजभूषण ओझा की छुट्टी; प्रो. माधव जनार्दन को कमान

बेबाक 24, वाराणसी।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के नए विश्वनाथ मंदिर (VT) के प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भ्रष्टाचार और नौकरी के नाम पर पैसों की लेन-देन के गंभीर आरोपों में घिरे प्रो. ब्रजभूषण ओझा को विश्वविद्यालय प्रशासन ने मानद प्रबंधक के पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। कुलसचिव कार्यालय द्वारा इस कार्रवाई का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।

​प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए धर्म मीमांसा विभाग के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे को विश्वनाथ मंदिर के मानद प्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। बता दें कि पद से हटाए गए प्रो. ब्रजभूषण ओझा बीएचयू के व्याकरण विभाग में प्रोफेसर हैं और पूर्व में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य भी रह चुके हैं।

क्या है पूरा मामला?

​बीएचयू कैंपस और सोशल मीडिया पर बीते दिनों एक शिकायत पत्र तेजी से वायरल हुआ था। शिकायतकर्ता दीपक कुमार पांडेय का आरोप था कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध एक महाविद्यालय में नौकरी दिलाने के एवज में उनसे ₹4 लाख रुपये लिए गए। मामला सिर्फ पत्र तक सीमित नहीं रहा; सोशल मीडिया पर एक ऑडियो और वीडियो क्लिप भी सामने आई, जिसके बाद विश्वविद्यालय की साख पर सवाल उठने लगे थे। शिकायतकर्ता ने इस बाबत लंका थाने में लिखित तहरीर भी दी थी।

पुलिसिया यू-टर्न और ओझा की सफाई

​मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब लंका थाना पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता दीपक पांडेय ने अचानक अपना मन बदलते हुए लिखित आवेदन दिया और शिकायत वापस ले ली। उसने पुलिस से किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न करने की बात कही।

​वहीं, दूसरी ओर प्रो. ब्रजभूषण ओझा ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी सफाई पेश करते हुए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि किसी के केवल आरोप लगा देने से गुनाह साबित नहीं हो जाता। उन्होंने शिकायतकर्ता को नियुक्ति का कोई आश्वासन नहीं दिया था।

बेबाक नजरिया

​हालांकि बीएचयू प्रशासन ने अपने लिखित आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह कार्रवाई वायरल भ्रष्टाचार के आरोपों के दबाव में की गई है या यह महज़ एक प्रशासनिक फेरबदल है। लेकिन कैंपस के गलियारों में चर्चा गरम है कि वायरल ऑडियो-वीडियो से धूमिल होती विश्वविद्यालय की छवि को बचाने के लिए प्रशासन को यह सख्त कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।



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