ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
प्राकृतिक आपदा प्राकृतिक आपदा

'5 साल में बाढ़ मुक्त असम' का वादा और जमीनी हकीकत; शिवसागर में तबाही के बाद उठे गंभीर सवाल

by on | 2026-08-04 18:19:03

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3057


'5 साल में बाढ़ मुक्त असम' का वादा और जमीनी हकीकत; शिवसागर में तबाही के बाद उठे गंभीर सवाल

शिवसागर : असम के ऊपरी जिलों—विशेषकर शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने राज्य में भीषण तबाही मचाई है। 2016 के 'विज़न डॉक्यूमेंट' और 2021 के चुनाव प्रचार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए "5 साल में असम को बाढ़ मुक्त बनाने" के वादे के बावजूद, 19 जुलाई से शुरू हुई इस आपदा ने सरकार के दावों और प्रशासनिक तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

तबाही के आंकड़े और प्रभावित इलाके

नेपाली खुटी गांव (बिहुबोर थाना क्षेत्र, शिवसागर) इस त्रासदी का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां दिखौ नदी के अभूतपूर्व उफान ने भारी तबाही मचाई है:

  • मृतकों का आंकड़ा: बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें अकेले शिवसागर जिले से लगभग 45 लोग शामिल हैं।

  • विस्थापन एवं जलभराव: राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (ASDMA) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 335 गांव अब भी जलमग्न हैं और हजारों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

क्या यह मानव जनित आपदा है? आरोप-प्रत्यारोप

विपक्ष, स्थानीय विधायक और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन इस विनाशकारी स्थिति के लिए राज्य सरकार और अवैध माइनिंग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं:

  • विपक्ष एवं अखिल गोगोई (विधायक, रायजोर दल) का आरोप: असम-नगालैंड सीमा पर चल रहे गैर-कानूनी कोयला खनन और क्रशर सिंडिकेट के कारण पहाड़ों में बने गड्ढों में पानी भरा, जो भारी बारिश के बाद अचानक मैदानी इलाकों में बह निकला। कांग्रेस ने इसकी सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज से जांच की मांग की है।

  • AASU का केंद्र सरकार पर हमला: आसू अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने कहा कि चुनाव के वक्त बड़े-बड़े वादे करने वाले केंद्रीय नेता ऐसी आपदा के समय असम की अनदेखी कर रहे हैं।

  • सरकार का रुख : मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए स्थिति को "अकल्पनीय तबाही" बताया। सरकार का कहना है कि नगालैंड के मोन जिले में बादल फटने की वजह से यह फ्लैश फ्लड आया है। प्राथमिकता राहत कार्य पूरा करने की है, जिसके बाद कारणों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी।

बेबाक24 टेक

पूर्वोत्तर भारत में हर साल आने वाली बाढ़ केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि तटबंधों के कुप्रबंधन, पहाड़ियों के अवैध खनन और सीमावर्ती पारिस्थितिकी के असंतुलन का नतीजा है। जब तक इसका दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक 'बाढ़ मुक्त असम' का वादा कागजों और चुनावी रैलियों तक ही सीमित रहेगा।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment