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'विपक्ष को साथ आना होगा, पर हम किसी के भरोसे नहीं'— नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

by admin@bebak24.com on | 2026-08-04 17:59:35

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'विपक्ष को साथ आना होगा, पर हम किसी के भरोसे नहीं'— नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

नई दिल्ली : आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने आगामी विधानसभा चुनावों, विपक्षी एकजुटता, छात्र आंदोलन और बहुजन राजनीति के नए समीकरणों पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्ष को एकजुट होना चाहिए, लेकिन वे अपनी पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत कर रहे हैं और किसी के भरोसे नहीं बैठे हैं।

छात्र आंदोलन और युवाओं का मुद्दा

  • सबसे पहले पहुंचने का दावा: जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "12 जुलाई को मैंने समर्थन दिया और 20 जुलाई को रिस्क लेकर सबसे पहले छात्रों के बीच पहुंचा। आईबी  की एडवाइजरी के बावजूद मैं युवाओं के साथ खड़ा रहा।"

  • सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप: उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले दबाव में मांगें मानीं, लेकिन अब वादों से मुकरकर छात्रों पर दमनकारी कार्रवाई कर रही है।

  • Gen Z से मुकाबला: उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार यह भूल रही है कि उसका मुकाबला पारंपरिक नेताओं से नहीं, बल्कि नई पीढ़ी से है जो अपनी हकमारी बर्दाश्त नहीं करेगी।

गठबंधन के विकल्प: 'अखिलेश, ओवैसी या मौर्य, सभी के लिए दरवाजे खुले'

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर चंद्रशेखर ने अपने सियासी पत्ते खोले:

  • सपा और अन्य दलों संग गठबंधन: अखिलेश यादव के साथ चुनाव लड़ने के सवाल पर बोले, "अगर कोई आकर कहेगा कि मिलकर लड़ना है, तो स्वागत है।" उन्होंने भाजपा के खिलाफ असदुद्दीन ओवैसी और स्वामी प्रसाद मौर्य संग भी राहें खुली होने का संकेत दिया।

  • 2024 की याद दिलाते हुए तंज: उन्होंने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में बड़े गठबंधनों ने उन्हें नजरअंदाज किया था, लेकिन नगीना की जनता ने उन्हें भारी बहुमत से संसद भेजा।

'जय भीम' का दायरा, आरक्षण और बहुजन राजनीति

  • संवैधानिक नारा: "जय भीम कोई धार्मिक या जातिगत नारा नहीं है। जैसे 'इंकलाब जिंदाबाद' क्रांति की पहचान बना, वैसे ही यह सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा का प्रतीक है।"

  • आरक्षण पर रुख: आरक्षण खत्म करने की बात करने वालों को पहले जाति व्यवस्था खत्म करने की चुनौती दी। उन्होंने सवाल उठाया कि 2019 से लागू EWS आरक्षण का लाभ लेने वाले लोग आरक्षण का विरोध कैसे कर सकते हैं?

  • मायावती और बसपा पर बयान: कांशीराम और मायावती के योगदान का सम्मान करते हुए कहा कि बहुजन समाज लंबे समय से सत्ता से बाहर है। 2012 के बाद से सत्ता से बेदखल रहने के कारण दलितों के अधिकार और संसाधन घटे हैं, जिसे बहाल करने के लिए नई ऊर्जा की जरूरत है।

बेबाक24 टेक

2024 में नगीना से मिली जीत के बाद चंद्रशेखर आजाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत धुरी बन चुके हैं। समाजवादी पार्टी और बसपा दोनों के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की उनकी क्षमता आगामी विधानसभा चुनावों में आजाद समाज पार्टी को एक निर्णायक 'किंगमेकर' के रूप में स्थापित कर सकती है।



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