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दिल्ली प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल पर घिरी सरकार! स्वतंत्र विशेषज्ञों के हवाले से बीबीसी की रिपोर्ट में बड़ा दावा

by admin@bebak24.com on | 2026-08-02 15:59:53

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दिल्ली प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल पर घिरी सरकार! स्वतंत्र विशेषज्ञों के हवाले से बीबीसी की रिपोर्ट में बड़ा दावा

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में बीते 20 जुलाई को शिक्षा सुधारों और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी तथा छात्र संगठनों द्वारा किए गए संसद मार्च के दौरान हुए बवाल में नया मोड़ आ गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्र बैलिस्टिक और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों को लगी चोटें 'पैलेट गन' और 'बर्डशॉट कारतूस' से लगी चोटों जैसी हैं।

यदि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह देश की राजधानी दिल्ली में नागरिकों या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का पहला मामला होगा।

विशेषज्ञों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुख्य दावे

ब्रिटेन के बैलिस्टिक फोरेंसिक वैज्ञानिक फिलिप बॉयस और आर्मामेंट रिसर्च सर्विसेज के निदेशक एनआर जेनज़ेन-जोन्स ने घायलों के एक्स-रे और तस्वीरों का विश्लेषण कर निम्नलिखित बिंदु रेखांकित किए:

  • हथियार का प्रकार: चोटों के निशान 12-गेज पंप-एक्शन शॉटगन से दागे गए 'बर्डशॉट' के घावों से पूरी तरह मेल खाते हैं।

  • दूरी और प्रभाव: घाव लगभग 50 से 100 फ़ुट की दूरी से दागे जाने की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार इतनी दूरी से भी ये छर्रे घातक और जानलेवा साबित हो सकते हैं।

  • चिकित्सकीय साक्ष्य: एम्स/सफदरजंग और लेडी हार्डिंग अस्पताल में भर्ती घायलों (जैसे शेख इरशाद और मोहित) के एक्स-रे में शरीर और गर्दन के हिस्से में दर्जनों छोटे धातु के कण/छर्रे धंसे हुए पाए गए हैं।

राजनीतिक घमासान: राहुल गांधी ने उठाया गृह मंत्रालय पर सवाल

इस मामले को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सियासत गरमा गई है:

  • विपक्ष का हमला: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने घायल छात्र साहिल लोचाब के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बल सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं और प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया है।

  • सरकार और पुलिस की सफाई: दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे "झूठा और गुमराह करने वाला" बताया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था और कोई गोली नहीं चलाई गई थी।

पैलेट गन का इतिहास और खतरे

  • कश्मीर में इस्तेमाल: भारत में 2010 से कश्मीर में भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल होता रहा है, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल और दृष्टिहीन हुए थे।

  • स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: डॉक्टरों और विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर के नाजुक हिस्सों में छर्रे फंसने पर सर्जरी बेहद जोखिम भरी होती है और शरीर में सीसा रहने से लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी खतरे बने रहते हैं।

बेबाक24 टेक

लोकतांत्रिक प्रदर्शनों में भीड़ नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों पर हमेशा से बहस होती रही है। राजधानी दिल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि घातक या गैर-घातक श्रेणी के हथियारों का इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी एक निष्पक्ष उच्चस्तरीय/फॉरेंसिक जांच होनी बेहद जरूरी है ताकि सच सामने आ सके और सुरक्षा बल व नागरिकों के बीच विश्वास बना रहे।



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