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CJP प्रवक्ता रत्ना सिंह का दावा— 'मौत की धमकियों और गालियों से भरा पड़ा है इनबॉक्स', कहा— 'अब कोई चीज़ परेशान नहीं करती'

by on | 2026-07-30 20:04:05

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CJP प्रवक्ता रत्ना सिंह का दावा— 'मौत की धमकियों और गालियों से भरा पड़ा है इनबॉक्स', कहा— 'अब कोई चीज़ परेशान नहीं करती'

नई दिल्ली : नीट पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं कॉकरोच जनता पार्टी की प्रवक्ता रत्ना सिंह ने बड़ा दावा किया है। रत्ना सिंह के अनुसार, सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां, अभद्र गालियां और नफरत भरे मैसेज भेजे जा रहे हैं।

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर जारी खींचतान के बीच CJP प्रवक्ता का यह बयान सामने आया है।

'मौत की धमकियां और गालियों की अंतहीन बाढ़': रत्ना सिंह का पोस्ट

रत्ना सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर अपनी आपबीती साझा करते हुए लिखा:

"मेरे डीएम मौत की धमकियों, गाली-गलौज भरे संदेशों और नफ़रत से भरे ट्वीट्स व कमेंट्स की अंतहीन बाढ़ से भरे हुए हैं। लेकिन अब इनमें से कोई भी चीज़ मुझे परेशान नहीं करती। कोई भी आलोचना या फैसला उस काम से बड़ा नहीं हो सकता, जो हमने किया है। कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसी बातें नहीं कहता, जिन्हें वह खुद अपने लिए सुनना पसंद न करे।"

उन्होंने आगे लिखा कि इस आंदोलन ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद मजबूत बनाया है और अराजकता व नफरत के बीच भी अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना सिखाया है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल

CJP के लगातार दबाव और प्रदर्शनों के बाद 25 जुलाई 2026 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

हालांकि, आंदोलन समाप्त होने या मंत्री के इस्तीफे के बाद भी सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि पुलिस जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में ले रही है और परेशान कर रही है।

बेबाक24 टेक

परीक्षा सुधारों और छात्रों के हक की बात उठाने वाले युवा नेताओं और प्रवक्ताओं को जिस तरह सोशल मीडिया पर संगठित ट्रोलिंग और साइबर बुलिंग का सामना करना पड़ रहा है, वह चिंताजनक है। लोकतांत्रिक आंदोलनों में मतभेद और आलोचना स्वाभाविक हैं, लेकिन महिला प्रवक्ताओं को दी जाने वाली मौत की धमकियां और गालियां साइबर सुरक्षा व पुलिसिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करती हैं।



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