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धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा स्पष्टीकरण; शुक्रवार नमाज़ के लिए चिह्नित की भोजशाला से सटी जमीन

by admin@bebak24.com on | 2026-07-30 21:09:50

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धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा स्पष्टीकरण; शुक्रवार नमाज़ के लिए चिह्नित की भोजशाला से सटी जमीन

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक व विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद (परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को उस विशिष्ट भूमि क्षेत्र की पहचान और सीमा तय कर दी है, जहां मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज़ अदा कर सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सुनवाई के मुख्य अंश

लाइव लॉ के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की तीन जजों की पीठ मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल की गई अर्जी पर सुनवाई कर रही थी:

  • भोजशाला के पास ही होगी नमाज़: सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश पर कायम रहते हुए स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज़ के लिए भोजशाला परिसर के पास स्थित वक्फ संपत्ति/दरगाह से सटी तय भूमि पर ही जगह दी जाएगी।

  • प्रशासनिक दूरी पर आपत्ति: सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफा अहमदी ने नक्शा पेश करते हुए दलील दी थी कि स्थानीय कलेक्टर ने जो वैकल्पिक स्थान तय किया था, वह भोजशाला से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर था।

  • सटी हुई वक्फ ज़मीन का विकल्प: अहमदी ने पीठ को बताया कि भोजशाला परिसर से बिल्कुल सटी हुई वक्फ संपत्तियां और दरगाह की ज़मीन उपलब्ध हैं, जो कानून-व्यवस्था को बनाए रखते हुए नमाज़ के लिए सबसे उपयुक्त स्थान हैं।

क्या था मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला?

15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ (डबल बेंच) ने धार की भोजशाला पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूरे परिसर को 'सरस्वती मंदिर' (मंदिर) माना था और हिंदू पक्ष के हक में फैसला दिया था।

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन परिसर के बाहर पास में ही शुक्रवार की नमाज़ के लिए जगह उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया था।

बेबाक24 टेक

सुप्रीम कोर्ट द्वारा भोजशाला परिसर के बिल्कुल निकट नमाज़ का स्थान स्पष्ट कर देने से एक तरफ जहां मुस्लिम समुदाय की पूजा/इबादत की तात्कालिक मांग पूरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन और पुलिस के सामने शुक्रवार के दिन कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने की दोहरी जिम्मेदारी आ गई है।



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