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मंत्री जी को 'धांधली' दिख गई, लेकिन जिला कृषि अधिकारी को 'चश्मा' कब मिलेगा?

by on | 2026-08-02 14:11:30

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मंत्री जी को 'धांधली' दिख गई, लेकिन जिला कृषि अधिकारी को 'चश्मा' कब मिलेगा?

गाजीपुर (बेबाक 24): ​शनिवार को गाजीपुर की धरती पर जब सूबे के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अचानक कदम रखा, तो कागजी घोड़ा दौड़ाने वाले महकमे में हड़कंप मच गया। मंत्री जी ने गाजीपुर स्थित 'आनंद खाद एवं बीज भंडार' पर अचानक छापेमारी की। जब स्टॉक रजिस्टर और जमीनी हकीकत का मिलान शुरू हुआ, तो काले कारनामों की परतें उधड़ती चली गईं।

​मंत्री जी सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने रजिस्टर में दर्ज किसान भाइयों के नंबरों पर सीधे फोन खटखटा दिए—और बस, वहीं पूरी 'कलाकारी' बेनकाब हो गई!

​कागजों पर यूरिया, जेब से लूटा पैसा!

​फोन पर बातचीत में जो सच सामने आया, उसने विभागीय ईमानदारी के दावों की धज्जियां उड़ा दीं:

  • ओवररेटिंग का नंगा नाच: 268 रुपये में मिलने वाली यूरिया की बोरी किसानों को 320 रुपये में छाती ठोक कर बेची जा रही थी।
  • आईडी का खेल: यूरिया खरीदने आए किसान की आईडी दर्ज करके उस पर डीएपी (DAP) चढ़ा दी गई—ताकि कागजी हेरफेर में सब्सिडी और कालाबाजारी का खेल बिना रुकावट चलता रहे।

​मामला पकड़ में आते ही मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने तत्काल दुकान का स्टॉक सीज करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए।

​बड़ा सवाल: 'बेबाक 24' चिल्लाता रहा, पर अफसर सोते रहे?

​अब सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि 'बेबाक 24' लंबे समय से गाजीपुर जनपद में खाद की ओवररेटिंग और बेधड़क हो रही कालाबाजारी की खबरें प्रमुखता से छापता आ रहा है।

गाजीपुर का किसान बूंद-बूंद पसीने से फसल सींच रहा है और बिचौलिए उसकी जेब काटने में मस्त हैं। जब तक लखनऊ से मंत्री जी खुद न आ जाएं, तब तक जिला कृषि अधिकारी और स्थानीय अमले की नींद क्यों नहीं टूटती? क्या यह चुप्पी महज लापरवाही है या फिर इस लूट में कोई मलाईदार सांठगांठ?


​सिर्फ एक दुकान क्यों? यूसुफपुर के 'रामदेव कुशवाहा खाद भंडार' की जांच कब?

​अगर मंत्री जी के एक फोन कॉल से इतना बड़ा फर्जीवाड़ा खुल सकता है, तो जरा सोचिए पूरे जिले में क्या खेल चल रहा होगा!

​जनपद के यूसुफपुर स्थित 'रामदेव कुशवाहा खाद भंडार' की कार्यशैली पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। किसान त्रस्त हैं, लेकिन इस दुकान के कागजात और रेट लिस्ट की सुध लेने वाला कोई नहीं है। 'बेबाक 24' पुरजोर मांग करता है कि यूसुफपुर के इस खाद भंडार की भी तत्काल निष्पक्ष जांच हो!

​पूछता है 'बेबाक 24':

  1. 1600 रुपये में आज भी बिक रही DAP: सरकारी दावों और मंत्री जी की नाराजगी के बावजूद आज भी धरातल पर किसानों को 1600 रुपये में डीएपी खरीदने पर मजबूर क्यों होना पड़ रहा है?
  2. कुंभकर्णी नींद में कृषि अधिकारी: हर चौक-चौराहे पर कालाबाजारी का नंगा नाच हो रहा है, फिर भी जिला कृषि अधिकारी (DAO) और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर अब तक कार्रवाई की गाज क्यों नहीं गिरी?
  3. जांच का चाबुक कब चलेगा? दुकानों को सीज करना तो सिर्फ एक जरिया है, असली गुनहगारों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?

​खबरों को दबाना हमारी फितरत नहीं, और किसानों के हक पर डाका डालने वालों का पर्दाफाश करना हमारा धर्म है। 'बेबाक 24' इस पूरे मामले पर अपनी नजर पैनी बनाए रखेगा।



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