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भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग बदला; पारंपरिक नीले की जगह 'केसरिया' रंग अपनाने पर वीरेन रास्किन्हा ने उठाए सवाल, हॉकी इंडिया ने दी सफाई

by admin@bebak24.com on | 2026-07-30 20:50:33

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भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग बदला; पारंपरिक नीले की जगह 'केसरिया' रंग अपनाने पर वीरेन रास्किन्हा ने उठाए सवाल, हॉकी इंडिया ने दी सफाई

नई दिल्ली (30 जुलाई 2026): अगले महीने नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आयोजित होने वाले FIH वर्ल्ड कप से पहले भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों की किट को लेकर बड़ा बदलाव और विवाद सामने आया है। भारतीय हॉकी टीम अब अपनी सालों पुरानी पारंपरिक नीली जर्सी के बजाय केसरिया रंग की जर्सी में मैदान पर उतरेगी।

इस अचानक हुए बदलाव पर भारतीय टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रास्किन्हा ने सवाल खड़े किए हैं, वहीं हॉकी इंडिया ने इस कदम को विशुद्ध रूप से एक तकनीकी जरूरत बताया है।

हॉकी इंडिया की दलील: 'ब्लू सिंथेटिक पिच' से विजिबिलिटी की समस्या

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पूर्व कप्तान वीरेन रास्किन्हा द्वारा उठाए गए सवालों के बाद हॉकी इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपना रुख स्पष्ट किया:

  • तकनीकी कारण: हॉकी इंडिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अब 'ब्लू सिंथेटिक टर्फ' का उपयोग मानक बन चुका है। नीले रंग की जर्सी इस नीले टर्फ के साथ घुल-मिल जाती थी, जिससे खेल के दौरान खिलाड़ियों को एक-दूसरे को साफ तौर पर देखने और गेंद की दिशा भांपने में दिक्कत आ रही थी।

  • संस्कृति और गौरव का प्रतीक: हॉकी इंडिया ने बताया कि केसरिया रंग साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक है। इस जर्सी को खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की सहमति से डिजाइन किया गया है।

पूर्व खिलाड़ियों की चिंताएं

पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज हॉकी खिलाड़ी वीरेन रास्किन्हा सहित कई विश्लेषकों ने इस बदलाव के औचित्य पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का तर्क है कि दशकों से भारतीय खेल टीमों की पहचान 'मैन इन ब्लू' और 'विमेन इन ब्लू' के रूप में रही है। ऐसे में जर्सी के प्राथमिक रंग को पूरी तरह बदल देना भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ जैसा है।

बेबाक24 टेक

आधुनिक हॉकी में टर्फ के रंग, ब्रॉडकास्ट क्वालिटी और विजिबिलिटी को ध्यान में रखते हुए अल्टरनेटिव किट का इस्तेमाल आम बात है। हालांकि, भारतीय हॉकी की मूल पहचान 'ब्लू' को पूरी तरह से रिप्लेस करके केसरिया करने के फैसले से खेल प्रेमियों और पूर्व दिग्गजों के बीच बहस छिड़ना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि नीदरलैंड्स और बेल्जियम की पिच पर यह नया रंग भारतीय टीम के लिए कितना भाग्यशाली साबित होता है।



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