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SFI नेता आइशी घोष को राहत; पटियाला हाउस कोर्ट ने रद्द किया गैर-जमानती वारंट

by admin@bebak24.com on | 2026-07-30 20:48:20

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SFI नेता आइशी घोष को राहत; पटियाला हाउस कोर्ट ने रद्द किया गैर-जमानती वारंट

नई दिल्ली: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की वरिष्ठ नेता और छात्र कार्यकर्ता आइशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द कर दिया है। अदालत ने ₹1,000 के जुर्माने के साथ वारंट को वापस लिया।

क्या है 2021 का बंग भवन प्रदर्शन मामला?

  • मामला: यह एफआईआर वर्ष 2021 में दिल्ली स्थित बंग भवन के बाहर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ी हुई है।

  • दर्ज धाराएं: आइशी घोष पर लोक सेवक के आदेश की अवहेलना आईपीसी की धारा 188और आपराधिक अतिक्रमण आईपीसी की धारा 447 सहित कई आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में पुलिस द्वारा आरोप पत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है।

  • अदालत का फैसला: ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने बुधवार को वारंट पर अंतरिम रोक लगाते हुए आइशी घोष को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। गुरुवार को अदालत में उनके उपस्थित होने के बाद जुर्माना लगाकर वारंट रद्द कर दिया गया।

सीपीएम मुख्यालय में पुलिस की मौजूदगी पर विवाद

इस कानूनी घटनाक्रम के बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस की टीम ने नई दिल्ली स्थित पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय से आइशी घोष को हिरासत में लेने/गिरफ्तार करने का प्रयास किया था।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ था जिसमें सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास बिना वर्दी वाली एक महिला पुलिस अधिकारी से तीखी बहस करते हुए नजर आ रहे थे।

जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़ी रही हैं आइशी घोष

आइशी घोष हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के खिलाफ एसएफआई  के नेतृत्व में चले बड़े छात्र आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा थीं। यह विरोध प्रदर्शन 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ था।

बेबाक24 टेक

पुराने मामलों में वारंट जारी होने और अदालत से राहत मिलने की यह कानूनी प्रक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब छात्र राजनीति से जुड़े नेता नीट आंदोलन के बाद केंद्रीय एजेंसियों व पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। अदालत से मिली इस तात्कालिक राहत से छात्र संगठनों को कानूनी मोर्चे पर संबल मिला है।



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