by admin@bebak24.com on | 2026-07-30 20:39:51
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वॉशिंगटन : अमेरिका में कोविड-19 महामारी के दौरान राष्ट्रपति के मुख्य चिकित्सा सलाहकार रहे डॉ. एंथनी फाउची ने अमेरिकी सीनेट की एक बेहद अहम और तीखी सुनवाई के दौरान सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया है।
फाउची ने सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सांसदों के तीखे सवालों का सामना करते हुए अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन का 100 से अधिक बार सहारा लिया, जिससे अमेरिकी राजनीति और स्वास्थ्य हलकों में नया विवाद छिड़ गया है।
'मुकदमा चलाने का डर': क्यों साधी डॉ. फाउची ने चुप्पी?
सीनेट समिति के सामने पेश हुए डॉ. फाउची ने स्पष्ट किया कि उन्हें आशंका है कि रिपब्लिकन सांसद उनके बयानों का इस्तेमाल उनके खिलाफ 'झूठी गवाही' देने का आरोप लगाकर कानूनी मुकदमा चलाने के लिए कर सकते हैं।
5वां संशोधन : अमेरिकी संविधान का 5वां संशोधन किसी भी नागरिक को यह अधिकार देता है कि उसे किसी भी आपराधिक मामले में अपने ही खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कानूनन 5वें संशोधन का उपयोग करना अपराध स्वीकार करना नहीं माना जाता।
फाउची का तर्क: फाउची ने कहा कि वे कोविड-19 की उत्पत्ति और महामारी नियंत्रण उपायों को लेकर अमेरिकी कांग्रेस की कई सुनवाइयों में पहले ही विस्तार से गवाही दे चुके हैं।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने कार्यकाल के अंत में डॉ. फाउची को अग्रिम माफी दे दी थी, जिसने 2014 से 2025 के बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) और व्हाइट हाउस में उनके द्वारा किए गए सभी कार्यों के लिए संघीय मुकदमों से सुरक्षा प्रदान की थी।
नया कानूनी खतरा: हालांकि, यह माफी 2025 के बाद के बयानों या नई सुनवाइयों में दी गई गवाही पर लागू नहीं होती। यही कारण है कि नए बयानों में किसी भी विसंगति (Contradiction) से बचने के लिए डॉ. फाउची ने चुप्पी साधना ही सुरक्षित समझा।
रिपब्लिकन सांसद लंबे समय से डॉ. फाउची पर आरोप लगाते रहे हैं कि उन्होंने वुहान लैब फंडिंग और कोविड वायरस की उत्पत्ति से जुड़ी जानकारी अमेरिकी जनता से छिपाई और महामारी के खतरों को लेकर गुमराह किया। हालांकि, डॉ. फाउची इन सभी राजनीतिक आरोपों को शुरू से खारिज करते आए हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी महामारी के दौरान स्वास्थ्य नीति का चेहरा रहे डॉ. फाउची का सीनेट में 5वें संशोधन का सहारा लेना यह दर्शाता है कि अमेरिका में कोविड-19 प्रबंधन का मुद्दा अब वैज्ञानिक बहस से निकलकर पूरी तरह से तीखी दलीय राजनीति और कानूनी लड़ाई का अखाड़ा बन चुका है।
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