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सोनम वांगचुक की जान को खतरा! सफदरजंग अस्पताल की रिपोर्ट पर पत्नी गीतांजलि का बड़ा खुलासा; हाई कोर्ट में याचिका दायर

by on | 2026-07-19 20:08:05

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सोनम वांगचुक की जान को खतरा! सफदरजंग अस्पताल की रिपोर्ट पर पत्नी गीतांजलि का बड़ा खुलासा; हाई कोर्ट में याचिका दायर

नई दिल्ली: जंतर-मंतर से जबरन उठाए गए प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमों ने सफदरजंग सरकारी अस्पताल प्रशासन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है

गीतांजलि ने अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन को पूरी तरह भ्रामक और फर्जी करार देते हुए आज (रविवार) ही इस मामले पर तुरंत सुनवाई  की मांग की है।

'सफदरजंग अस्पताल से उठ गया भरोसा'— गीतांजलि का गंभीर आरोप

शनिवार सुबह से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक लंबा पोस्ट साझा कर पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने दो अलग-अलग लैब की विरोधाभासी रिपोर्ट्स का खुलासा किया:

  • अस्पताल की डराने वाली रिपोर्ट: गीतांजलि के अनुसार, सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने उन्हें मौखिक रूप से डराया कि वांगचुक का पोटैशियम लेवल गिरकर 2.9 हो गया है, जो कि बेहद चिंताजनक और जान के लिए खतरा है। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि अस्पताल ने अपने आधिकारिक पब्लिक हेल्थ बुलेटिन में इस 'वास्तविक लेवल' को छुपा लिया।

  • प्राइवेट लैब का चौंकाने वाला खुलासा: अस्पताल के दावों पर शक होने के बाद, करीब 10 घंटे के लंबे संघर्ष और बार-बार मांग करने के बाद रात 10:30 बजे पुलिस ने वांगचुक का ब्लड सैंपल बाहर भेजने की अनुमति दी। गीतांजलि ने बताया, "जब हमने एक स्वतंत्र  लैब से जांच करवाई, तो पोटैशियम का स्तर 3.5 आया, जो पूरी तरह से सामान्य के दायरे में है।"

अस्पताल बना 'जेल', छावनी में तब्दील हुआ फ्लोर

गीतांजलि ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन और पुलिस मिलकर उनके पति के साथ कैदियों जैसा बर्ताव कर रहे हैं:

गीतांजलि जे अंगमों का बयान: "बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अस्पताल प्रशासन उन्हें न तो डिस्चार्ज कर रहा है और न ही हमारी पसंद के किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने दे रहा है। हमारे फ्लोर पर करीब 30 बंदूकधारी पुलिसकर्मी और पूरे अस्पताल परिसर में 100 से ज्यादा जवान तैनात हैं। हमारी आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया है। यह इलाज के नाम पर सिर्फ और सिर्फ अवैध हिरासत है।"

उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अस्पताल के भीतर सोनम वांगचुक की सेहत को कुछ भी नुकसान होता है, तो इसकी पूरी और सीधी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और गृह मंत्रालय (सरकार) की होगी।

हाई कोर्ट से लगाई गुहार— 'तबीयत बिगड़ने से पहले शिफ्ट करने की मिले इजाजत'

इन्हीं गंभीर हालातों को देखते हुए गीतांजलि ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. अस्पताल बदलने की अनुमति: सोनम वांगचुक की तबीयत और ज्यादा खराब होने से पहले उन्हें सफदरजंग अस्पताल के चंगुल से निकालकर किसी विश्वसनीय निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत दी जाए।

  2. संवैधानिक अधिकार: किसी भी परिवार को अपने मरीज के इलाज की जगह चुनने के लिए इस तरह सिस्टम से न लड़ना पड़े, यह नागरिकों का बुनियादी अधिकार है।

बेबाक24 टेक

यह पूरा घटनाक्रम किसी लोकतांत्रिक देश की व्यवस्था के बजाय किसी तानाशाही शासन की याद दिलाता है। सोनम वांगचुक कोई अपराधी या आतंकवादी नहीं हैं; वे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शांतिपूर्ण सत्याग्रह पर बैठे थे। पहले उन्हें जंतर-मंतर से घसीटकर हटाना, फिर अस्पताल में 100 पुलिसकर्मियों का पहरा बैठाना और सबसे शर्मनाक— मेडिकल रिपोर्ट्स में कथित तौर पर हेरफेर करके जान का खतरा बताना, यह दर्शाता है कि प्रशासन किसी भी तरह वांगचुक को डराकर या ड्रिप चढ़ाकर उनका अनशन तुड़वाना चाहता है।

बेबाक24 का कानूनी विश्लेषण कहता है कि एक प्राइवेट लैब की रिपोर्ट में पोटैशियम का स्तर नॉर्मल आना और सरकारी अस्पताल द्वारा उसे 2.9 बताकर पैनिक क्रिएट करना, सीधे तौर पर 'मेडिकल कदाचार' की श्रेणी में आता है। दिल्ली हाई कोर्ट को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति के इलाज का नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 (Right to Life and Liberty) के तहत उनके जीने के अधिकार का हनन है। सोमवार को होने वाले सीजेपी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च से पहले सरकार वांगचुक को पूरी तरह नजरबंद रखना चाहती है, लेकिन हाई कोर्ट का यह रुख तय करेगा कि देश में कानून का राज है या लाठी का।



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