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ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग! जॉर्डन में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत, जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर किया बड़ा हवाई हमला

by on | 2026-07-19 19:56:20

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ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग! जॉर्डन में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत, जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर किया बड़ा हवाई हमला

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान: मध्य पूर्व से इस वक्त की सबसे बड़ी और खौफनाक खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। ईरान द्वारा किए गए भीषण बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में जॉर्डन में तैनात दो अमेरिकी सैनिकों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि एक सैनिक अब भी लापता है।

इस आत्मघाती हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर अमेरिकी सेना ने शनिवार रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले  किए हैं। दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम  एक महीने के भीतर ही पूरी तरह तार-तार हो चुका है।


जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ईरान का मिसाइल तांडव; 1 लापता, 4 घायल

अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शुक्रवार को ईरान समर्थित ताकतों या ईरानी सेना ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे।

  • बड़ा नुकसान: इस भीषण हमले में दो अमेरिकी जांबाज सैनिकों की मौत हो गई और एक सैनिक लापता है, जिसकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

  • अस्पताल में भर्ती: सेंटकॉम के मुताबिक, हमले में घायल चार अन्य अमेरिकी सैनिकों को तुरंत जॉर्डन के स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। वहीं, मामूली रूप से चोटिल सैनिक वापस अपनी ड्यूटी पर लौट आए हैं।

गोपनीयता बरकरार: सुरक्षा कारणों और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने फिलहाल मारे गए सैनिकों की पहचान, उनके रैंक और घटना वाली वास्तविक मिलिट्री लोकेशन को पूरी तरह गुप्त रखा है।

डोनाल्ड ट्रंप का 'एक्शन रिप्ले'; ईरान पर लगातार आठवीं रात महाविनाशक हवाई हमला

जॉर्डन में अपने सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए व्हाइट हाउस ने कुछ ही घंटों के भीतर सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया। सेंटकॉम ने पुष्टि की है कि शनिवार रात अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के भीतर भारी बमबारी की।

  • लगातार 8वीं रात हमला: अमेरिका द्वारा ईरान पर यह लगातार आठवीं रात की गई सैन्य कार्रवाई है।

  • निशाने पर IRGC: अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों का सीधा मकसद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की उन ताकतों को नेस्तनाबूद करना है, जिन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था।

  • होर्मुज़ स्ट्रेट का संकट: अमेरिका ने साफ किया है कि इन हमलों के जरिए वे होर्मुज़ स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय कॉमर्शियल जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह पंगु बना देना चाहते हैं।

एक महीने में ही टूटा युद्धविराम; थम नहीं रहा तनाव

यह घातक सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है जब महज एक महीने पहले दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। पिछले एक हफ्ते से दोनों परमाणु और सैन्य महाशक्तियों के बीच तनाव चरम पर है:

  1. पोर्ट नाकेबंदी: अमेरिका ने वैश्विक प्रतिबंधों को कड़ा करते हुए ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी दोबारा लागू कर दी है।

  2. चोक पॉइंट पर कब्जा: इसके जवाब में भड़के ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग यानी 'होर्मुज़ स्ट्रेट' को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक ईंधन आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार मचने की स्थिति पैदा हो गई है।

बेबाक24 टेक

मध्य पूर्व में पिछले कई महीनों से सुलग रही आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। जॉर्डन की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की मौत होना एक ऐसा 'रेड लाइन' पार करना है, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है। यह सीधे तौर पर अमेरिका की संप्रभुता और उसकी वैश्विक सैन्य धाक को चुनौती है।

बेबाक24 का सामरिक विश्लेषण कहता है कि ईरान का 'होर्मुज़ स्ट्रेट' को बंद करना और अमेरिका का ईरान के बंदरगाहों को ब्लॉक करना, दोनों देशों को एक ऐसे पूर्ण युद्ध की ओर धकेल रहा है जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं है। लगातार 8 रातों से अमेरिका ईरान के भीतर आईआरजीसी के ठिकानों को तबाह कर रहा है, लेकिन ईरान का पलटवार थमा नहीं है। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि यदि यह संघर्ष आगे बढ़ा, तो जॉर्डन के साथ-साथ पूरे खाड़ी देश , इजरायल और सऊदी अरब भी इस युद्ध की लपटों में आ जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र इस वक्त पूरी तरह अक्षम नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक रुख यह साफ संकेत दे रहा है कि अमेरिका अब ईरान के भीतर सत्ता परिवर्तन या उसकी मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करने के बाद ही दम लेगा, भले ही इसकी कीमत दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आहट के रूप में चुकानी पड़े।



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