ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
हेल्थ हेल्थ

राजस्थान में प्रसव के बाद 5 माताओं ने मांगी इच्छामृत्यु; 'नई ज़िंदगी दो या गरिमापूर्ण मौत', स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

by on | 2026-07-19 16:13:44

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3007


राजस्थान में प्रसव के बाद 5 माताओं ने मांगी इच्छामृत्यु; 'नई ज़िंदगी दो या गरिमापूर्ण मौत', स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

जयपुर/कोटा: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सूबे की मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद गंभीर संक्रमण और अंग फेल होने के कारण बीते 72 दिनों से हफ़्ते में दो बार डायलिसिस पर चल रही पांच पीड़ित माताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।

पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे अस्पताल अपने बच्चों को जन्म देने और घर में खुशियां लाने गई थीं, लेकिन डॉक्टरों की कथित लापरवाही और दूषित दवाओं/संक्रमण के चलते आज वे ज़िंदा लाश बन चुकी हैं।


'सिर्फ 500 ML पानी पर ज़िंदा हैं हम'; राष्ट्रपति को लिखे पत्र में छलका दर्द

कोटा की रहने वाली पांच प्रसूताओं— रागिनी मीणा, धन्ली सुमन, पिंकी ऐरवाल, आरती चोबदार और सुशीला महावर ने राष्ट्रपति को स्पीड पोस्ट से भेजे संयुक्त पत्र में अपने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण की दर्दनाक दास्तां बयां की है:

  • असहनीय शारीरिक दर्द: महिलाओं ने लिखा कि किडनी फेल होने के कारण वे पिछले दो महीनों से 24 घंटे में मात्र 500 मिलीलीटर पानी पर ज़िंदा हैं। सांस लेने में भयंकर तकलीफ होती है और हर 48 घंटे में होने वाले डायलिसिस के कारण बदन ठंडा पड़ जाता है, उल्टियां होती हैं, और हाथ-पैर में असहनीय दर्द होता है।

  • नवजात बच्चों से दूरी: ये अभागी माएं पिछले ढाई महीने से अपने नवजात बच्चों की सूरत तक नहीं देख पाई हैं। मां का दूध न मिलने के कारण सुशीला महावर के ढाई महीने के बच्चे के पेट में गांठ पड़ गई है और वह भी अस्पताल में भर्ती है।

  • आर्थिक तबाही: इन पीड़ित महिलाओं की देखभाल के चक्कर में इनके पतियों के प्राइवेट काम-धंधे और नौकरियां पूरी तरह छूट चुकी हैं, जिससे परिवार भुखमरी की कगार पर हैं।

पीड़िताओं की अंतिम गुहार: "हमारी किडनी ट्रांसप्लांट निशुल्क करवाई जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और उचित मुआवजा मिले। अगर शासन-प्रशासन हमें न्याय देने में असमर्थ है, तो हमें ससम्मान अपना जीवन समाप्त करने के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए।"

कोटा से बीकानेर तक फैली मौत की कड़ियां: क्या है पूरा मामला?

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में पिछले ढाई महीनों (मई से जुलाई 2026) के दौरान सिज़ेरियन (ऑपरेशन) से बच्चों को जन्म देने के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और मौत होने का एक खौफनाक पैटर्न सामने आया है:

  1. कोटा: 4 से 7 मई के बीच कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 18 महिलाओं के ऑपरेशन हुए। इनमें से 5 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 5 महिलाएं वेंटिलेटर से लौटने के बाद अब परमानेंट डायलिसिस पर हैं।

  2. बीकानेर: कोटा के तुरंत बाद बीकानेर में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहाँ 5 महिलाओं ने दम तोड़ दिया

  3. अन्य जिले: जोधपुर में भी कई मामले सामने आए (हालांकि यहाँ मौत नहीं हुई), जबकि भीलवाड़ा में 5 और बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत की खबरें मीडिया में आ चुकी हैं।

दवाओं पर बैन और सस्पेंशन की कार्रवाई, पर जांच रिपोर्ट अब भी 'सीक्रेट'

मामला बढ़ने पर जनता ने उग्र प्रदर्शन किए, जिसके बाद सरकार ने ऑपरेशन थिएटर सील कर दिए और ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं को आनन-फानन में बैन कर दिया। मामले को शांत करने के लिए दो चिकित्सा कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया गया।

दिल्ली एम्स और जयपुर की विशेषज्ञ टीमों ने अस्पतालों और दवाओं के सैंपल लिए। लेकिन बेहद शर्मनाक बात यह है कि घटना के दो महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है और असली कारणों को छिपाया जा रहा है।

  • स्वास्थ्य मंत्री का तर्क: राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का कहना है कि सभी घटनाओं को एक ही कारण (जैसे दूषित दवा या ओटी संक्रमण) से जोड़ना ठीक नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक गंभीर हाई बीपी, अत्यधिक ब्लीडिंग और प्री-एग्ज़िस्टिंग हेल्थ इश्यूज़ के चलते भी लीवर-किडनी फेल हो सकते हैं।

  • अशोक गहलोत का हमला: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा अस्पताल में पीड़िताओं से मुलाकात के बाद भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार अगर समय रहते पीड़ितों और विपक्ष की आवाज सुन लेती, तो आज महिलाओं को राष्ट्रपति से मौत नहीं मांगनी पड़ती। सरकार जानबूझकर जांच रिपोर्ट को दबा रही है।

डायलिसिस से इनकार के बाद जागा प्रशासन; मिला लिखित आश्वासन

13 जुलाई को जब इन महिलाओं ने तंग आकर डायलिसिस कराने से पूरी तरह इनकार कर दिया और 15 जुलाई को राष्ट्रपति को पत्र भेजा, तब जाकर प्रशासन के हाथ-पांव फूले। 16 जुलाई को कोटा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर विनोद मल्होत्रा और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने पीड़ितों से वार्ता की और एक लिखित आश्वासन पत्र सौंपा, जिसके बाद महिलाओं ने डायलिसिस कराया।

लिखित आश्वासन की मुख्य बातें:

  • प्रसूताओं को अस्पताल में डायलिसिस और अन्य तमाम चिकित्सकीय सुविधाएं आजीवन पूर्ण रूप से निशुल्क मिलेंगी।

  • जोधपुर एम्स समेत राज्य के किसी भी बड़े अस्पताल में परिजनों की सुविधा के अनुसार निशुल्क किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाएगा और उसका रजिस्ट्रेशन व आगे का सारा खर्च सरकार उठाएगी।

बेबाक24 टेक

यह घटना केवल मेडिकल लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की संपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के वेंटिलेटर पर होने का पुख्ता प्रमाण है। कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जैसे अलग-अलग जिलों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक ही समय पर प्रसव के बाद महिलाओं की किडनियां फेल होना और मौतें होना यह साफ इशारा करता है कि या तो सरकारी सप्लाई में आने वाली एनेस्थीसिया/एंटीबायोटिक दवाएं घटिया व दूषित थीं, या फिर अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटरों में जानलेवा बैक्टीरियल इन्फेक्शन फैल चुका था।

'जन स्वास्थ्य अभियान राजस्थान' की समन्वयक छाया पचौली की यह बात बिल्कुल सही है कि जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की निगरानी करने में हमारा जमीनी सिस्टम पूरी तरह फेल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भजनलाल शर्मा सरकार आखिर एम्स की जांच रिपोर्ट को जनता के सामने लाने से क्यों डर रही है? क्या सरकार दवाओं के किसी बड़े टेंडर घोटाले या किसी रसूखदार दवा कंपनी को बचाना चाहती है?



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment