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​गाडियों के काफिले की सर्चिंग से हड़कंप; क्या अतुल राय के पास छिपा है मुख्तार का खजाना?

by on | 2026-07-18 23:08:28

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 ​गाडियों के काफिले की सर्चिंग से हड़कंप; क्या अतुल राय के पास छिपा है मुख्तार का खजाना?


वाराणसी/गाजीपुर।

पूर्वांचल के अंडरवर्ल्ड और सियासत के गठजोड़ पर पुलिस प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार शुरू कर दिया है। माफिया मुख्तार अंसारी के कथित 'मैनेजर' और पूर्व सांसद अतुल राय के भारी-भरकम काफिले पर पुलिस द्वारा चलाए गए औचक सर्च ऑपरेशन से पूरे इलाके में खलबली मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, पच्चासों गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ चलने वाले अतुल राय के साथ कई कुख्यात अपराधी और संदिग्ध साए की तरह रहते हैं। हालांकि, पुलिसिया कार्रवाई की भनक लगते ही कुछ संदिग्ध मौके से पहले ही खिसकने में कामयाब रहे।

पुलिस महकमे में गहरी पैठ, पुनीत राय करता है 'मैनेजमेंट'

​चर्चा है कि हिस्ट्रीशीटर पूर्व सांसद अतुल राय की पकड़ केवल अंडरवर्ल्ड तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस विभाग में भी उनकी जड़ें बेहद गहरी हैं। यही वजह है कि कार्रवाई से पहले ही गुर्गों को भनक लग गई। पुलिसिया 'मैनेजमेंट' और विभाग में सेटिंग का पूरा जिम्मा अतुल राय के खास गुर्गे और शूटर पुनीत राय उर्फ सोनू के कंधों पर बताया जाता है।

अतीत का वो काला पन्ना: यह वही रसूख है जिसका खामियाजा एक बलात्कार पीड़िता को भुगतना पड़ा था। पीड़िता ने जब आत्महत्या की, तो उसने कई पुलिस अधिकारियों के नाम उजागर किए थे, जिसके बाद जांच की आंच में कई बड़े अफसरों को जेल की हवा खानी पड़ी थी।


डीआईजी वैभव कृष्ण खुद संभाल रहे हैं कमान

​इस बार पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद डीआईजी वैभव कृष्ण कर रहे हैं। उनके कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि माफिया के गुर्गों और मददगारों पर अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई होने वाली है।

क्या अतुल राय के पास है मुख्तार का खजाना? SIT गठन की सुगबुगाहट

​पूर्वांचल के अंडरवर्ल्ड के जानकारों की मानें तो मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसकी अकूत दौलत और खजाने का बड़ा हिस्सा पूर्व सांसद अतुल राय के पास सुरक्षित हो सकता है। गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी के भी चहेते रहे अतुल राय पर अब शिकंजा कसने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

जान का खतरा महज स्वांग? वीडियो ने खोली थी पोल

​सियासी गलियारों में चर्चा है कि अतुल राय ने खुद को कानून और विरोधियों से बचाने के लिए 'मुख्तार से जान का खतरा' होने का जो आरोप लगाया था, वह महज एक स्वांग (नाटक) था ताकि डान की दौलत को सुरक्षित रखा जा सके। इस दावे को हवा तब मिली जब मुख्तार के बेटे के 'दावते उलेमा' कार्यक्रम का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें अतुल राय चेहरे पर मास्क लगाकर शामिल होते दिखे थे।



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