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२० जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र को लेकर 'टीम मोदी' की बड़ी बैठक

by admin@bebak24.com on | 2026-07-17 22:07:31

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२० जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र को लेकर 'टीम मोदी' की बड़ी बैठक

नई दिल्ली (बेबाक२४): संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर देश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। २० जुलाई २०२६ से शुरू होकर १३ अगस्त २०२६ तक चलने वाले इस मानसून सत्र से ठीक पहले, केंद्र सरकार ने अपनी विधायी और संसदीय रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार (१७ जुलाई २०२६) को दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू सहित 'टीम मोदी' के कई वरिष्ठ सिपहसालार शामिल हुए। बैठक में विपक्ष के आक्रामक तेवरों का सामना करने और अपने विधायी एजेंडे को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने पर गहन मंथन हुआ।


मानसून सत्र २०२६: तारीखें और रूपरेखा

  • अवधि: सत्र की शुरुआत २० जुलाई को होगी और यह १३ अगस्त २०२६ को समाप्त होगा। लगभग चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की बैठकें होंगी।

  • संसदीय प्रक्रिया: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र बुलाने की सरकारी सिफारिश को मंजूरी दे दी है। सत्र का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक चर्चा और निर्णय लेना है।

संसद के पटल पर आने वाले ७ महत्वपूर्ण विधेयक

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मानसून सत्र के दौरान सरकार संसद की मंजूरी के लिए ७ प्रमुख विधेयकों (५ नए विधेयक और २ पुराने/विरासत विधेयक) को पटल पर रखने की तैयारी कर रही है:

नए विधेयक 

  1. आयकर (संशोधन) विधेयक, २०२६ (Income-tax Amendment Bill): पिछले महीने जारी किए गए अध्यादेश को बदलने के लिए, जिसके तहत पश्चिम एशिया संकट के कारण गिरते रुपये को संभालने और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) में निवेश पर विदेशी निवेशकों को कर छूट दी गई थी।

  2. राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक (Prevention of Insults to National Honour Amendment Bill): इसके माध्यम से राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान वैधानिक सुरक्षा दी जाएगी और इसके अपमान को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा।

  3. जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक (Registration of Births and Deaths Amendment Bill): वर्ष १९६९ (२०२३ में संशोधित) के मूल अधिनियम में बदलाव कर 'देरी से होने वाले पंजीकरण' के नियमों को और अधिक सख्त बनाने का प्रावधान।

  4. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक (MSME Development Amendment Bill): 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (आसानी से व्यापार) को बढ़ावा देने और नियमों को विश्वास-आधारित बनाने के लिए।

  5. खाद्य सुरक्षा से जुड़ा विधेयक: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) २०१३ में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव।

विरासत/पुराने लंबित विधेयक 

  1. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill): विदेशी चंदे के दुरुपयोग को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।

  2. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, २०२५ (VBSA Bill): देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यूजीसी (UGC), एआईसीटीई (AICTE) और एनसीटीई (NCTE) को समाप्त कर एक एकल, एकीकृत नियामक आयोग (Single Regulatory Commission) बनाने का प्रस्ताव।

किन मुद्दों पर घमासान होने के आसार?

बैठक में सरकार ने विपक्ष की उन संभावित रणनीतियों पर भी चर्चा की, जिनके जरिए सदन को बाधित करने का प्रयास किया जा सकता है:

  • नीट (NEET) पेपर लीक और छात्र आंदोलन: देशव्यापी स्तर पर चल रहे प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध और सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।

  • १३०वां संविधान संशोधन विधेयक (JPC रिपोर्ट): इस विधेयक के तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री किसी गंभीर मामले में गिरफ्तार होकर लगातार ३० दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वतः पद से हटा दिया जाएगा। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित मानकर इसका विरोध कर रहा है।

  • डिलिमिटेशन (परिसीमन) और अन्य स्थानीय विवाद: परिसीमन और 'ऑपरेशन सिंदूर' से जुड़े विवादों पर भी सदन गरमाने के पूरे आसार हैं।

मानसून सत्र २०२६: विधायी और रणनीतिक ढांचा

विवरण का पैमानासंसदीय कार्यक्रम और रणनीति
सत्र की तिथि२० जुलाई से १३ अगस्त २०२६
सर्वदलीय बैठकसरकार द्वारा १९ जुलाई (रविवार) सुबह ११ बजे बुलाई गई है।
विपक्षी रणनीतिविपक्ष की संयुक्त बैठक २० जुलाई को होगी।
प्रमुख फोकसउच्च शिक्षा में सुधार, आयकर रियायतें, और वंदे मातरम को वैधानिक दर्जा।

बेबाक२४ टेक

संसद का मानसून सत्र केवल सरकारी विधेयकों को पारित कराने की औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि यह देश के ज्वलंत मुद्दों पर खुली और स्वस्थ चर्चा का मंच बनना चाहिए। इस समय देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और सोनम वांगचुक का आंदोलन जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दे सामने खड़े हैं।

बेबाक२४ का मानना है कि 'टीम मोदी' द्वारा सत्र से पहले की गई यह रणनीतिक बैठक यह दर्शाती है कि सरकार अपने विधेयकों को पारित करवाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, लोकतंत्र की असली परीक्षा इस बात में है कि सत्ता पक्ष विपक्ष के सवालों और देश के युवाओं की चिंताओं को कितनी संवेदनशीलता से सुनता है। १९ जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक इस बात का संकेत देगी कि आगामी सत्र में हंगामे की बारिश होगी या सार्थक बहसों की फुहार।



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