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सोनम वांगचुक बोले— 'शरीर का 20% हिस्सा खत्म हो चुका है, लेकिन दिमाग काम कर रहा है'; 20 जुलाई के संसद मार्च का किया आह्वान

by on | 2026-07-18 20:47:07

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सोनम वांगचुक बोले— 'शरीर का 20% हिस्सा खत्म हो चुका है, लेकिन दिमाग काम कर रहा है'; 20 जुलाई के संसद मार्च का किया आह्वान

नई दिल्ली: नीट परीक्षा (NEET Exam) में कथित धांधली और छात्रों की जवाबदेही को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे देश के जाने-माने जलवायु व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार (18 जुलाई) को 21वें दिन में प्रवेश कर गई है। शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर जारी एक बेहद भावुक और कड़े वीडियो संदेश में वांगचुक ने अपनी गिरती सेहत और इस आंदोलन की भविष्य की रणनीति पर खुलकर बात की।


'फैट और मसल्स खत्म, पर हौसला बुलंद': वांगचुक

28 जून से लगातार अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने वीडियो में अपनी शारीरिक स्थिति का ब्योरा देते हुए कहा:

"मैं अभी भी ज़िंदा हूं। अनशन के दौरान मेरे शरीर का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा चला गया है। शरीर का फैट खत्म होने के बाद अब मसल्स (मांसपेशियां) भी गल चुकी हैं। इसके बाद अंदरूनी अंग (Internal Organs) जाएंगे और आख़िर में दिमाग़। लेकिन अभी वो नौबत नहीं आई है। आज 20वां दिन ख़त्म हो रहा है और मैं यह साबित कर सकता हूं कि मेरा दिमाग़ बिल्कुल ठीक और सक्रिय रूप से काम कर रहा है।"

'जब प्याज पर सरकारें गिर सकती हैं, तो छात्रों के भविष्य पर क्यों नहीं?'

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की जवाबदेही के सवाल पर वांगचुक ने देश के राजनीतिक इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने जनता से सीधा सवाल करते हुए कहा:

  • ऐतिहासिक मिसालें: "भारत की जनता को अपने बच्चों की जान और शिक्षा ज़्यादा प्यारी है या प्याज़? देश में जनता के आंदोलन की ताक़त से पहले तीन बार सरकारें गिरी हैं। 1980 में केंद्र की सरकार और 1998 में दिल्ली व राजस्थान की सरकारें सिर्फ़ प्याज़ की बढ़ती क़ीमतों के कारण गिर गई थीं।"

  • 20 से अधिक छात्रों की आत्महत्या: वांगचुक ने दावा किया कि इस बार मुद्दा कोई सब्जी या प्याज नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और जीवन का है। इस साल नीट परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के कारण 20 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और जवाबदेही तय होना बेहद लाजिमी है।

20 जुलाई को 'संसद मार्च' का बड़ा एलान; सुरक्षा पर उठे सवाल

सोनम वांगचुक ने देश की जनता और छात्रों से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा, "20 जुलाई को मेरे साथ संसद की ओर मार्च कीजिए। हमारी असली ताक़त आपकी संख्या है। मैं अकेला, भूखा और एक साधारण इंसान हूं, असली ताक़त आप लोगों के हाथ में है।"

अनशन स्थल पर सुरक्षा में चूक का दावा: इस बीच, आंदोलन का समर्थन कर रही 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। दीपके के मुताबिक, जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान सोनम वांगचुक पर हमला करने की कोशिश की गई और उनकी तरफ कोई अज्ञात वस्तु फेंकी गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में वांगचुक को कोई चोट नहीं आई है, लेकिन इसने अनशन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बेबाक24 टेक

21 दिनों से अन्न का एक दाना न लेने के बाद शरीर का 20% हिस्सा खो देना किसी भी इंसान के लिए जानलेवा हो सकता है। सोनम वांगचुक का यह वीडियो संदेश सीधे तौर पर सरकार की संवेदनशीलता को झकझोरने वाला है। इतिहास गवाह है कि भारत में जब-जब युवाओं और शिक्षा के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है, तब-तब बड़े आंदोलनों ने सत्ता की चूलें हिला दी हैं।

बेबाक24 का विश्लेषण कहता है कि 20 जुलाई का संसद मार्च इस पूरे आंदोलन का टर्निंग पॉइंट (Turning Point) साबित हो सकता है। सीजेपी के दावों के बीच, दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय को वांगचुक की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों को प्राथमिकता देनी चाहिए। लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे एक नागरिक पर हमला या उसकी आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास उलटा पड़ सकता है। सरकार को हठधर्मिता छोड़कर तुरंत इस मामले में बीच-बचाव करना चाहिए और छात्रों से संवाद स्थापित करना चाहिए।



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