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तेजस मार्क-1ए में देरी: रक्षा मंत्री ने की समीक्षा, HAL पर लग सकता है हर्जाना

by on | 2026-06-08 21:32:39

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तेजस मार्क-1ए में देरी: रक्षा मंत्री ने की समीक्षा, HAL पर लग सकता है हर्जाना

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) की युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को दिए गए 180 एलसीए तेजस मार्क-1ए (LCA Tejas Mk-1A) विमानों के मेगा प्रोजेक्ट में देरी को लेकर रक्षा मंत्रालय अब बेहद सख्त रुख अपना रहा है। कई बार निर्धारित समयसीमा चूकने के बाद, सोमवार (8 जून) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्च स्तरीय बैठक में इस परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।

इस बैठक में रक्षा सचिव, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और HAL के सीएमडी सहित रक्षा मंत्रालय के तमाम शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, रडार के प्रदर्शन और कुछ अन्य तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के बाद HAL इसी महीने (जून) वायुसेना के सामने फाइनल रिव्यू मीटिंग के लिए आ सकता है।

HAL पर पेनल्टी की तैयारी, अमेरिकी कंपनी GE भी घेरे में

लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में हो रहे अप्रत्याशित विलंब के कारण वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह सार्वजनिक मंचों से कई बार चिंता और नाराजगी जता चुके हैं।

  • HAL पर लगेगा हर्जाना: रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अनुबंध (Contract) की शर्तों के तहत तय समय पर विमान न देने के लिए मंत्रालय HAL पर भारी पेनल्टी (जुर्माना) लगाने की तैयारी कर रहा है।

  • अमेरिकी कंपनी पर भी एक्शन: दूसरी तरफ, इंजनों की आपूर्ति में देरी को लेकर खुद HAL भी अमेरिकी रक्षा कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) पर पेनल्टी लगाने की बात कह चुका है, जिसने इंजन समय पर डिलीवर नहीं किए।

क्या है वायुसेना का रुख? 'नॉन-नेगोशिएबल' मानकों पर समझौता नहीं

वायुसेना ने देश के इस स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रम को गति देने के लिए कुछ व्यावहारिक ढील देने के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन मुख्य मानकों पर कोई समझौता नहीं होगा:

  • शर्तों के साथ राहत: यदि कुछ ऐसी तकनीकी कमियां हैं जो विमान की सुरक्षा को प्रभावित नहीं करतीं (मसलन, कोई सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक होने के बजाय फिलहाल मैनुअल मोड पर काम कर रहा हो), तो वायुसेना विमान को अस्थायी रूप से स्वीकार कर सकती है।

  • गुणवत्ता सर्वोपरि: हालांकि, जो तकनीकी मानक 'नॉन-नेगोशिएबल' (जिन पर बातचीत संभव नहीं) श्रेणी में रखे गए हैं, उनमें रत्ती भर भी ढील नहीं दी जाएगी।

साल के अंत तक 24 विमान होने की उम्मीद, स्थिति फिलहाल इस प्रकार है:

रक्षा मंत्रालय को उम्मीद है कि इसी वर्ष (2026) तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी हर हाल में शुरू हो जाएगी। वर्तमान में प्रोजेक्ट की स्थिति निम्नलिखित है:

  • मौजूदा इन्वेंट्री: HAL के पास इस समय 6 इंजन उपलब्ध हैं।

  • स्ट्रक्चर तैयार: लगभग 18 विमानों के बेसिक स्ट्रक्चर (ढांचे) तैयार हो चुके हैं।

  • वार्षिक लक्ष्य: इस वर्ष के अंत तक कुल 24 विमानों को पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

डेटा शीट: भारतीय वायुसेना और तेजस कार्यक्रम का गणित


प्रमुख बिंदुवर्तमान स्थिति / विवरण
वायुसेना की कुल जरूरत42 फाइटर स्क्वॉड्रन (देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक)
वर्तमान क्षमताकेवल 29 फाइटर स्क्वॉड्रन एक्टिव हैं (13 की भारी कमी)
पहले वेरिएंट की स्थिति40 तेजस मार्क-1 विमान वायुसेना के बेड़े में शामिल हो चुके हैं।
पहले चरण की डील83 तेजस मार्क-1ए विमानों का सौदा (जिससे 4 नए स्क्वॉड्रन बनेंगे)।
दूसरे चरण की मंजूरी97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1ए विमानों की खरीद को हरी झंडी।
इंजन समझौता (2021)अमेरिकी कंपनी GE के साथ 99 F404 इंजनों की डील हुई थी।
आगामी उन्नत संस्करणतेजस मार्क-2 (Tejas Mk-2), जिस पर वर्तमान में तेजी से काम जारी है।

Bebak24 टेक

भारतीय वायुसेना इस समय इतिहास के सबसे बड़े स्क्वॉड्रन संकट (42 की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 29) से जूझ रही है। ऐसे में तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी में एक-एक महीने की देरी भी देश की हवाई सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम है। रक्षा मंत्रालय द्वारा अपने ही सार्वजनिक उपक्रम (PSU) यानी HAL पर पेनल्टी लगाने की तैयारी यह साफ संदेश देती है कि अब 'चलता है' वाला रवैया रक्षा सौदों में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

HAL के लिए असल चुनौती अमेरिकी कंपनी GE से इंजनों की सप्लाई सुनिश्चित कराना है। हालांकि, जून की इस प्रस्तावित रिव्यू मीटिंग में अगर रडार और एवियोनिक्स से जुड़े तकनीकी मुद्दों का समाधान निकल जाता है, तो यह देश के एयरोस्पेस सेक्टर और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के लिए वर्ष 2026 की सबसे राहत भरी खबर होगी।



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