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जंतर-मंतर पर CJP का 5 घंटे प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा

by on | 2026-06-06 22:23:39

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जंतर-मंतर पर CJP का 5 घंटे प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री से मांगा इस्तीफा

नई दिल्ली | नीट (NEET), सीबीएसई (CBSE) और सीयूईटी (CUET) समेत देश की मुख्य परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामले को लेकर शनिवार (6 जून) को राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर युवाओं के जबरदस्त आक्रोश का गवाह बना। सोशल मीडिया से उपजे युवा आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले हजारों छात्रों और युवाओं ने लगातार 5 घंटे तक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।

अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई बीच में छोड़कर सुबह ही दिल्ली लौटे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठाई और उन्हें 5 दिन का अल्टीमेटम दिया। हालांकि, दोपहर 3:30 बजे दीपके की तबीयत अचानक बिगड़ने के कारण शनिवार का धरना समय से पहले समाप्त कर दिया गया, लेकिन संगठन ने अगले शनिवार (13 जून) को दोबारा जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है।


एयरपोर्ट से सीधे धरनास्थल: अंबेडकर की आत्मकथा और संविधान के साथ एंट्री

शनिवार सुबह का सियासी घटनाक्रम बेहद नाटकीय और तेज रहा:

- सुबह 7:30 बजे: CJP के सूत्रधार अभिजीत दीपके अमेरिका से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे। भारत की धरती पर कदम रखते ही उन्होंने देश में परीक्षा प्रणालियों की विफलता को लेकर गहरा दुख जताया।

- पहला फोन कॉल और रणनीति: एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद अभिजीत दीपके ने सबसे पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात को फोन मिलाया। दोनों नेताओं के बीच देश भर में परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और युवाओं के इस आंदोलन की भविष्य की रूपरेखा को लेकर गहन चर्चा हुई।

- सुबह 10:00 बजे: एयरपोर्ट से बाहर निकलकर अभिजीत सीधे पार्टी के मुख्य प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ जंतर-मंतर पहुंचे। उनके हाथों में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की आत्मकथा और भारत के संविधान की प्रति थी, जिसे उन्होंने तानाशाही के खिलाफ युवाओं की ढाल बताया।


सोनम वांगचुक का बड़ा समर्थन: "गिरफ्तारी हुई तो करेंगे 6 हफ्ते का उपवास"

इस छात्र आंदोलन को नागरिक समाज और विपक्ष के दिग्गज नेताओं का चौतरफा समर्थन मिला:

- सोनम वांगचुक की मौजूदगी: मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक हाथों में गुलाब का फूल लेकर जंतर-मंतर पहुंचे और युवाओं के साथ मंच साझा किया। वांगचुक ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अभिजीत दीपके को इस शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए गिरफ्तार किया गया, तो वे 6 सप्ताह के कड़े उपवास पर बैठ जाएंगे।

- विपक्ष की एकजुटता: इस प्रदर्शन में वामपंथी छात्र संगठनों के अलावा CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और CPI नेता एनी राजा भी शामिल हुए।


प्रमुख नेताओं के सियासी बयान

"लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करने वाले इस पेपर लीक मामले पर आवाज़ उठाने वाले नौजवानों को 'कीड़े-मकोड़े' या 'कॉकरोच' कहना उनका भयंकर अपमान है। यह आंदोलन सरकार के अहंकार के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी है।"

— उद्धव ठाकरे, प्रमुख - शिवसेना (UBT)


"गुरूरमंद हुक्मरानों तक पहुंचे ये आवाज, अब नौजवानों ने भी कर दिया है इंकलाब।"

— अखिलेश यादव, अध्यक्ष - समाजवादी पार्टी (CJP प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए)


दूसरी ओर, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने आंदोलन पर पलटवार करते हुए कहा कि विदेश में बैठी कुछ ताकतें देश के युवाओं को नकारात्मक राजनीति की तरफ धकेलने और गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं।


टाइमलाइन: 5 घंटे का घटनाक्रम

समयघटनाक्रम
सुबह 07:30 AMअभिजीत दीपके दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, अंदर से ही CPM नेता वृंदा करात से फोन पर चर्चा की।
सुबह 09:30 AMहाथ में संविधान की कॉपी लेकर CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ जंतर-मंतर रवाना।
सुबह 10:30 AMजंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू; 'लीक इन इंडिया' और 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के नारे गूंजे।
दोपहर 12:00 PMअभिजीत ने मंच संभाला; 5 घंटों में कुल 5 बार छोटे-छोटे आक्रामक भाषण दिए।
दोपहर 02:15 PMसोनम वांगचुक मंच पर पहुंचे; भीड़ 2,000 के पार पहुंची, कुछ प्रदर्शनकारी कॉकरोच मास्क पहने दिखे।
दोपहर 03:30 PMलगातार यात्रा और थकान के कारण अभिजीत दीपके की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों की सलाह पर प्रदर्शन समाप्त।

CJP का उदय: CJI के बयान से सोशल मीडिया तक

इस अनूठे आंदोलन की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही है। दरअसल, 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि रोजगार न मिलने के कारण युवा 'कॉकरोच' की तरह एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बन रहे हैं। इसी बयान के विरोध में 16 मई को अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक डिजिटल अभियान शुरू किया।

देखते ही देखते यह मजाक एक राष्ट्रीय जन-आंदोलन में बदल गया। डेटा विश्लेषण करने वाली वेबसाइट BRAND24 के मुताबिक, पिछले 7 दिनों में CJP से जुड़े पोस्ट्स को 2 करोड़ से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस आंदोलन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं, जहां 25.7% लोग इसके खिलाफ निगेटिव पोस्ट कर रहे हैं, वहीं लगभग 70% लोग इसे न्यूट्रल दृष्टिकोण से देख रहे हैं।


सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुलिस की कार्रवाई

प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी एयरपोर्ट, मुख्य रेलवे स्टेशनों और दिल्ली के बॉर्डर पॉइंट्स पर सुरक्षा अभेद्य कर दी थी। जंतर-मंतर पर 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। प्रदर्शन के दौरान एहतियात के तौर पर 6 लोगों को हिरासत में लिया गया था, क्योंकि पुलिस को समर्थकों और विरोधियों के बीच टकराव की आशंका थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है। उधर, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पुणे) में स्थित अभिजीत के पैतृक घर पर भी सुरक्षा बढ़ाते हुए बैरिकेडिंग की गई है।


Bebak24 टेक

'कॉकरोच जनता पार्टी' का यह प्रदर्शन भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है, जहाँ सोशल मीडिया पर बने 'मीम्स' और डिजिटल नैरेटिव अब सीधे जंतर-मंतर पर हजारों की भीड़ जुटा रहे हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे अभिजीत दीपके इस बात को बखूबी समझते हैं कि युवाओं की बेरोजगारी और बार-बार होते पेपर लीक के गुस्से को ज़मीन पर कैसे उतारा जाए।

आंदोलन की शुरुआत में ही देश की कद्दावर वामपंथी नेता वृंदा करात से रणनीतिक बातचीत करना और सोनम वांगचुक जैसे चेहरों को मंच पर लाना यह साफ करता है कि CJP अब केवल एक 'मजाकिया डिजिटल पेज' नहीं है, बल्कि यह बेहद सधे हुए राजनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ रहा है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा सीबीएसई और एनटीए के शीर्ष अधिकारियों के तबादलों को युवाओं ने 'दिखावा' बताकर खारिज कर दिया है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह इस युवा आक्रोश से प्रशासनिक स्तर पर कैसे निपटती है, क्योंकि 13 जून की अगली डेडलाइन सरकार के नीतिगत ढुलमुल रवैये पर भारी पड़ सकती है।



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