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एक तो चोरी, दूजे सीनाजोरी: एनकाउंटर के बाद बवाल के पीछे था अपराधियों को सेफ एस्केप देने का 'मास्टरप्लान'!

by on | 2026-06-05 23:25:04

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एक तो चोरी, दूजे सीनाजोरी: एनकाउंटर के बाद बवाल के पीछे था अपराधियों को सेफ एस्केप देने का 'मास्टरप्लान'!


गाजीपुर/वाराणसी: अपराध की दुनिया का एक दस्तूर बेहद पुराना है—जब कानून का शिकंजा कसने लगे, तो मजमे का सहारा लो, पथराव करो और पुलिस को बैकफुट पर धकेल दो। इनामी बदमाश कमलेश चौधरी उर्फ कमलेश बिंद के एनकाउंटर के बाद फतेहपुर सिकंदरा गोड़ा गांव में जो कुछ भी हुआ, वो महज एक तात्कालिक गुस्सा नहीं था। 'बेबाक 24' की खुफिया पड़ताल में जो सच सामने आ रहा है, वो बेहद चौंकाने वाला है। शव को सड़क पर रखकर बवाल काटने का असली मकसद था— मुख्य सरगना शंकर पांडेय और उसके साथियों को सुरक्षित भागने के लिए वक्त देना और पुलिसिया कार्रवाई की दिशा को भटकाना।

​ 'चोरी और सीनाजोरी' का खेल: बैकफुट पर लाने की थी साजिश

​पुलिस की ताबड़तोड़ घेराबंदी से बौखलाए अपराधियों के मददगारों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम किया। इस पूरे बवाल का क्रोनोलॉजी समझिए:

  • मकसद नंबर 1: एनकाउंटर के बाद अचानक ऐसा माहौल खड़ा कर दिया जाए जिससे गाजीपुर से लेकर वाराणसी तक की पुलिस कानून-व्यवस्था संभालने में उलझ जाए।
  • मकसद नंबर 2: जब पुलिस बवाल शांत कराने और लाठी-पत्थर झेलने में व्यस्त हो, ठीक उसी वक्त विनीत राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी शंकर पांडेय, आलोक दूबे और उनके गुर्गों को अंडरग्राउंड होने या जिला छोड़ने का 'सेफ एस्केप' मिल जाए।
  • रणनीति: पुलिस पर इस कदर दबाव बनाया जाए कि वह आगे किसी और अपराधी का एनकाउंटर करने से पहले सौ बार सोचे। यानी सीधे तौर पर खाकी को बैकफुट पर धकेलने का एक बड़ा और शातिर प्लान था।

​ उपद्रवियों पर पुलिस का 'हंटर': दर्ज हुआ गंभीर धाराओं में मुकदमा

​लेकिन, अपराधियों और उनके आकाओं का यह दांव उल्टा पड़ गया। एसपी डॉ. ईरज राजा और देर रात मौके पर पहुंचे डीआईजी वैभव कृष्ण के सख्त तेवरों ने साफ कर दिया कि सीनाजोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पत्थरबाजों ने सीओ सिटी समेत कई जवानों को लहुलूहान जरूर किया, लेकिन अब पुलिस का 'हंटर' पूरी ताकत से चल चुका है।

​उपनिरीक्षक राम मिलन यादव की तहरीर पर शहर कोतवाली में 6 नामजद और 70 से अधिक अज्ञात (जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत केस दर्ज कर अपराधियों की धरपकड़ शुरू कर दी गई है।

​इन नामजद आरोपियों की कुंडली खंगाल रही है पुलिस:

  1. संजय कुमार बिंद (निवासी: गोड़ा देहाती)
  2. अनिता बिंद (निवासी: गोड़ा देहाती)
  3. मोहिल बिंद (निवासी: गोड़ा देहाती)
  4. राजकुमार बिंद (निवासी: गोड़ा देहाती)
  5. कमलवता (निवासी: कैमूर, बिहार — जो अंतरप्रांतीय कनेक्शन की ओर इशारा कर रहा है)
  6. विन्चरिया बिंद (निवासी: नोनहरा)

​ 'बेबाक 24' का सीधा विश्लेषण: कानून का इकबाल कायम रहेगा

​फिलहाल फतेहपुर सिकंदरा गोड़ा गांव छावनी में तब्दील है। भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन सन्नाटे के पीछे पुलिस की खुफिया टीमें हर उस चेहरे को चिह्नित करने में जुटी हैं जो इस 'चोरी और सीनाजोरी' के खेल में शामिल थे।



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