by on | 2026-06-05 19:33:47
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गुवाहाटी: असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार शुक्रवार (5 जून) को राजभवन में संपन्न हो गया। इस महा-विस्तार में कुल 12 विधायकों को राज्यपाल ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
करीब तीन हफ्ते पहले (12 मई) केवल चार मंत्रियों के साथ शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री सरमा ने इस विस्तार के जरिए सरकार की प्रशासनिक क्षमता को पूरी रफ्तार देने की तैयारी कर ली है। इस फेरबदल के बाद असम मंत्रिपरिषद की कुल संख्या मुख्यमंत्री समेत अब 17 हो गई है।
इस नई कैबिनेट की सबसे बड़ी खासियत पुराने और बेहद भरोसेमंद चेहरों का दबदबा रहना है, जबकि क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन साधने के लिए 4 नए चेहरों को भी पहली बार लालबत्ती दी गई है।
शपथ लेने वाले मंत्रियों की पूरी सूची (दल वार)
भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी 'असम गण परिषद' (AGP) के जिन 12 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है, उनका वर्गीकरण इस प्रकार है:
| क्रमांक | मंत्री का नाम | राजनीतिक दल | सांगठनिक पृष्ठभूमि / समीकरण |
| 1 | अश्विनी राय सरकार | भाजपा | नया चेहरा; पहली बार कैबिनेट में शामिल |
| 2 | बिस्वजीत दैमारी | भाजपा | नया चेहरा; पूर्व विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) |
| 3 | नीलिमा देवी | भाजपा | नया चेहरा; महिला प्रतिनिधित्व और सांगठनिक पकड़ |
| 4 | सुसांता बोरगोहैन | भाजपा | नया चेहरा; युवाओं और क्षेत्रीय समीकरण को तरजीह |
| 5 | केशब महंत | असम गण परिषद | सहयोगी दल; पिछली एनडीए सरकार के अनुभवी मंत्री |
| 6 | अशोक सिंघल | भाजपा | पुराने दिग्गज; प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता |
| 7 | पीयूष हजारिका | भाजपा | पुराने दिग्गज; मुख्यमंत्री के बेहद करीबी और मुखर चेहरा |
| 8 | जयंत मल्लबरुआ | भाजपा | पुराने दिग्गज; पिछली कैबिनेट के संकटमोचक |
| 9 | रणोज पेगू | भाजपा | पुराने दिग्गज; शिक्षा और जनजातीय मामलों के जानकार |
| 10 | बिमल बोरा | भाजपा | पुराने दिग्गज; औद्योगिक और प्रशासनिक निरंतरता |
| 11 | कौशिक राय | भाजपा | बराक घाटी का प्रतिनिधित्व; क्षेत्रीय संतुलन |
| 12 | कृष्णेंदु पॉल | भाजपा | बराक घाटी का प्रतिनिधित्व; क्षेत्रीय संतुलन |
पुराने चेहरों पर भरोसा और नए चेहरों की रणनीति
- प्रशासनिक निरंतरता: अशोक सिंघल, पीयूष हजारिका, जयंत मल्लबरुआ, रणोज पेगू और बिमल बोरा जैसे कद्दावर नेताओं को दोबारा कैबिनेट में लाकर भाजपा नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि सरकार स्थिरता और प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता देना चाहती है। ये सभी नेता पिछली सरकार में भी अहम विभाग संभाल चुके हैं।
- क्षेत्रीय और जातीय संतुलन: असम गण परिषद (AGP) के केशव महंत को शामिल कर सहयोगियों को साधा गया है, वहीं बराक घाटी से आने वाले कौशिक राय और कृष्णेंदु पॉल को दोबारा मौका देकर असम के भौगोलिक संतुलन को बरकरार रखा गया है।
- दैमारी का चौंकाने वाला प्रमोशन: असम की पिछली विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) रहे बिस्वजीत दैमारी को कैबिनेट मंत्री बनाना सबसे बड़ा रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। इसके जरिए बोडोलैंड और जनजातीय क्षेत्रों में पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करेगी।
इन दिग्गजों की हुई छुट्टी, संगठन में मिलेगा स्थान
नई कैबिनेट के गठन में जहां कईयों को पद मिला, वहीं परफॉर्मेंस और सांगठनिक फेरबदल के तहत कुछ पुराने मंत्रियों को बाहर का रास्ता भी दिखाया गया है:
- चंद्र मोहन पटोवारी (पिछली सरकार के वरिष्ठ मंत्री)
- जोगेन मोहन
- उरखाओ ग्वरा ब्रह्मा (गठबंधन सहयोगी)
बड़ा बदलाव: पिछली सरकार में सबसे मजबूत मंत्रियों में से एक रहे रंजीत कुमार दास को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है, बल्कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की नई और बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीतिक विश्लेषण और टेक
असम में हिमंत बिस्व सरमा का यह कैबिनेट विस्तार यह साफ दिखाता है कि मुख्यमंत्री असम में किसी भी प्रकार का राजनीतिक 'रिस्क' नहीं लेना चाहते हैं। पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में जहां शुभेंदु अधिकारी सरकार में नए चेहरों की भारी भरकम फौज के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर रस्साकशी जारी है, वहीं असम में हिमंत सरमा ने अपने पुराने 'क्राइसिस मैनेजर्स' (अशोक सिंघल और पीयूष हजारिका) को अक्षुण्ण रखा है।
रंजीत कुमार दास जैसे कद्दावर नेता को स्पीकर बनाकर और पुराने तीन मंत्रियों को हटाकर भाजपा ने यह साफ कर दिया है कि आगामी मिशन से पहले संगठन और सरकार के भीतर एक कड़ा अनुशासन और 'एंटी-इन्कंबेंसी' (सत्ताबिमुखता) को काटने की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है।
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