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सरकारी जमीन पर मजार के नाम पर 'कब्जा' बर्दाश्त नहीं: संभल में गरजा 'बाबा का बुलडोजर', खंडेश्वर शिव मंदिर के पास बनी 600 साल पुरानी अवैध मजार ध्वस्त

by on | 2026-06-05 18:46:57

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सरकारी जमीन पर मजार के नाम पर 'कब्जा' बर्दाश्त नहीं: संभल में गरजा 'बाबा का बुलडोजर', खंडेश्वर शिव मंदिर के पास बनी 600 साल पुरानी अवैध मजार ध्वस्त

संभल। तुष्टिकरण और अवैध कब्जों के खिलाफ 'बाबा का बुलडोजर' एक बार फिर पूरी ताकत से गरजा है। इस बार कार्रवाई संभल जिले के बबराला थाना क्षेत्र के बाघऊ गांव में हुई है, जहां खंडेश्वर शिव मंदिर के पास सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई 'चमन शाह बाबा' की मजार को प्रशासन ने पूरी तरह जमींदोज कर दिया।

​कथित तौर पर 500-600 साल पुरानी बताई जाने वाली इस मजार को लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ मिलकर यह बड़ी कार्रवाई की।

​कानून का राज: 3 जून को खारिज हुई थी अपील, फिर चला बुलडोजर

​प्रशासन की यह कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद की गई है।

  • राजस्व संहिता के तहत मुकदमा: इस मामले में स्थानीय लेखपाल की रिपोर्ट और जांच के आधार पर ग्राम सभा की ओर से अजीज (पुत्र अल्लन) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
  • अवैध कब्जे की पुष्टि: जांच में सामने आया कि यह मजार अवैध रूप से 24 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर कब्जा करके बनाई गई थी।
  • अपील खारिज: तहसीलदार कोर्ट द्वारा अतिक्रमण हटाने और जुर्माने के आदेश के खिलाफ अजीज ने जिलाधिकारी की अदालत में अपील की थी, जिसे 3 जून 2026 को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

​अदालत से हरी झंडी मिलते ही सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं और अवैध ढांचे को ढहा दिया गया।

​मौके पर अभेद्य किला बना रहा बाघऊ गांव, PAC तैनात

​कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति या सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे।

  • अधिकारियों की मौजूदगी: संभल जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) खुद इस ध्वस्तीकरण की मॉनिटरिंग कर रहे थे।
  • विशेष टीम का गठन: तहसीलदार रवि सोनकर के नेतृत्व में गठित विशेष टीम के प्रभारी नायब तहसीलदार अनुज कुमार बनाए गए थे।
  • भारी सुरक्षा बल: मौके पर करीब 70 पुलिसकर्मी, पीएसी (PAC) के जवान और स्थानीय पुलिस की टीमें मुस्तैद रहीं, जिससे उपद्रवियों को सिर उठाने का कोई मौका नहीं मिला।

​आस्था की आड़ में अतिक्रमण का दावा?

​मजार की देखरेख करने वाले अजीज ने दावा किया कि यह जगह पीर बाबा के नाम से जानी जाती है और करीब 500-600 साल पुरानी है, जिससे स्थानीय लोगों की आस्था जुड़ी है।

बेबाक टिप्पणी: लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या आस्था की आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जा जायज ठहराया जा सकता है? कानून की नजर में अवैध अतिक्रमण सिर्फ अतिक्रमण होता है, चाहे वह कितना भी पुराना क्यों न हो।


​'धार्मिक स्थल के नाम पर कब्जा बर्दाश्त नहीं' – प्रशासन

​एसडीएम गुन्नौर विकास चंद्र ने इस मामले पर रुख साफ करते हुए कहा कि जांच और अदालती फैसलों के बाद यह पूरी तरह साबित हो चुका था कि यह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा था। कानून के दायरे में रहकर ही यह सख्त कार्रवाई की गई है।

​प्रशासन ने दो टूक चेतावनी दी है कि धार्मिक स्थलों के नाम पर सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था कायम है।



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