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दिल्ली में बैठकों का महामंथन खत्म: क्या सीएम योगी की हरी झंडी के बाद बदलेगी यूपी बीजेपी की तस्वीर?

by on | 2026-06-05 18:03:03

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दिल्ली में बैठकों का महामंथन खत्म: क्या सीएम योगी की हरी झंडी के बाद बदलेगी यूपी बीजेपी की तस्वीर?

लखनऊ/दिल्ली: उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। दिल्ली के बंद कमरों में हफ्ते भर चले सियासी मैराथन और दिग्गजों के साथ मंथन के बाद, आखिरकार प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह लखनऊ लौट आए हैं। लखनऊ आते ही दोनों नेताओं ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की।

​भले ही इस मुलाकात को आधिकारिक तौर पर मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के जश्न की तैयारियों से जोड़ा जा रहा हो, लेकिन राजनीति के गलियारों में चर्चा साफ है—यह मुलाकात यूपी बीजेपी की नई 'टीम-2026' पर अंतिम मुहर लगाने के लिए थी।

​ दिल्ली का महामंथन: शाह से लेकर संतोष तक की आपत्ति और संशोधन

​सूत्रों की मानें तो दिल्ली में बैठकों का दौर बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरा रहा। प्रदेश नेतृत्व की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष और विनोद तावड़े जैसे कद्दावर नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें हुईं।

नामों पर कैंची: चर्चा है कि प्रदेश स्तर से ले जाई गई सूची के कुछ नामों पर केंद्रीय नेतृत्व ने गंभीर आपत्ति जताई, जिसके बाद दिल्ली में ही लिस्ट में बड़े संशोधन किए गए।


अंतिम वीटो सीएम का: अब जब केंद्रीय नेतृत्व के साथ सहमति बन चुकी है, तो गेंद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पाले में है। मुख्यमंत्री की अंतिम सहमति मिलते ही नई कार्यकारिणी की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है।


​ आधी आबादी को पूरा हक: महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी!

​इस बार के संगठन विस्तार में जो सबसे बड़ी और चौंकाने वाली रणनीति सामने आ रही है, वह है महिला प्रतिनिधित्व को भारी बढ़ावा देना। भाजपा इस बार महिलाओं को सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि संगठन के मुख्य नीति-निर्धारक पदों पर बैठाने के मूड में है।

रणनीति साफ है: उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री जैसे रसूखदार पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाकर पार्टी आधी आबादी को एक बड़ा और सीधा सियासी संदेश देना चाहती है।

​ युवा जोश और नए चेहरों का 'तड़का'

​खबरें यह भी हैं कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में "नो-परफॉर्मर" और कई पुराने दिग्गजों की विदाई तय मानी जा रही है।

सूत्रों का कहना है: "संगठन में नई ऊर्जा फूंकने के लिए इस बार अनुभवी नेताओं के साथ-साथ आक्रामक और युवा चेहरों को तरजीह दी जाएगी। पार्टी अब नई सोच के साथ जमीन पर उतरना चाहती है।"

​ एक तीर से दो निशाने: संगठन की मजबूती और 12 साल का जश्न

​नई टीम के सामने आते ही सबसे बड़ी चुनौती और पहला टास्क मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर चलने वाला विशेष महाअभियान होगा। इसके जरिए भाजपा:

​केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जिला, मंडल और बूथ स्तर तक घर-घर पहुंचाएगी।


​नए संगठन की जमीनी ताकत और जनता के बीच उसकी पकड़ का पहला लिटमस टेस्ट भी करेगी।


बेबाक बात: दिल्ली की दौड़ खत्म हो चुकी है और लखनऊ में सीएम आवास पर मंथन भी पूरा हो चुका है। अब बस इंतजार है उस फाइनल लिस्ट का, जो यह तय करेगी कि यूपी बीजेपी में किसकी 'लॉटरी' लगी है और किसका 'पत्ता' कटा है।



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