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CM योगी के मंत्री का अपराधियों को सख्त संदेश, कहा- सिर उठाया तो जहन्नुम का टिकट तय, 1978 के दंगा पीड़ितों को सौंपे जमीन के दस्तावेज

by on | 2026-06-04 23:25:10

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CM योगी के मंत्री का अपराधियों को सख्त संदेश, कहा- सिर उठाया तो जहन्नुम का टिकट तय, 1978 के दंगा पीड़ितों को सौंपे जमीन के दस्तावेज

संभल/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अपराधियों और दंगाइयों की छाती पर योगी सरकार का बुलडोजर किस तरह न्याय की नई इबारत लिख रहा है, इसकी एक बानगी संभल में देखने को मिली है। साल 1978 के खौफनाक सांप्रदायिक दंगे में अपना सब कुछ गंवाकर पलायन करने वाले रस्तोगी परिवार को आखिरकार 48 साल बाद अपनी ही धरती पर हक और इंसाफ मिल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीधी पहल पर, कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी जमीन पर दंगा पीड़ित परिवार को न सिर्फ 100 वर्ग मीटर का पट्टा सौंपा गया, बल्कि वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ उनके नए आशियाने की नींव भी रख दी गई।

​इस ऐतिहासिक और भावुक पल के गवाह बने यूपी सरकार के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, जिन्होंने इस मौके पर अपराधियों और मजहबी दंगाइयों को बेहद कड़े लहजे में अंतिम चेतावनी दे डाली।

​'सिर उठाया तो जहन्नुम का टिकट तय!' — मंत्री राठौर की खुली हुंकार

​समारोह को संबोधित करते हुए सूबे के कद्दावर मंत्री जेपीएस राठौर का रुख बेहद आक्रामक रहा। उन्होंने माफियाओं और दंगाइयों को सीधे शब्दों में ललकारते हुए कहा कि आज संभल को 'असली आजादी' मिली है।

​"यह नया उत्तर प्रदेश है। यहां अपराधियों और दंगाइयों के लिए कोई जगह नहीं है। कानून का राज स्थापित हो चुका है और अब अगर किसी ने भी दोबारा सिर उठाने की या अमन-चैन बिगाड़ने की जुर्रत की, तो योगी सरकार उसका सीधे 'जहन्नुम का टिकट' काट देगी।"

जे.पी.एस. राठौर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), यूपी सरकार


​1978 का वह खौफनाक सच: 109 घाव और लाश के टुकड़े!

​संभल का यह मामला रूह कंपा देने वाला है। 24 नवंबर 2024 की हिंसा के बाद जब जांच की परतें खुलीं, तो 1978 के दंगे का वो काला सच सामने आया जिसे पुरानी सरकारों ने फाइलों में दफन कर दिया था।

  • निर्मम हत्याकांड: 1978 में दंगाइयों ने राम सरन दास रस्तोगी की उनकी दुकान में घुसकर चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी।
  • क्रूरता की हदें पार: हत्यारों ने शव के टुकड़े किए, उसे तराजू से बांधा और सामने वाले कुएं में फेंक दिया। तीन दिन बाद जब लाश निकली, तो उस पर चाकू के 109 निशान थे।
  • पलायन की मजबूरी: इस बर्बरता के बाद लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों के चलते रस्तोगी परिवार को रातों-रात संभल से पलायन करना पड़ा था।

​अवैध कब्जे पर चला बुलडोजर, भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त हुई जमीन

​संभल हिंसा के बाद पीड़ित परिवार ने जब सीएम योगी आदित्यनाथ से दोबारा बसने की गुहार लगाई, तो प्रशासन तुरंत एक्शन में आया। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने पुरानी पत्रावलियां खंगालकर शासन को भेजीं।

​रस्तोगी परिवार को शेर खां सराय इलाके में जो जमीन दी गई है, वह वही सरकारी भूमि है जिसे प्रशासन ने 12 अगस्त 2025 को कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से बुलडोजर चलाकर जमींदोज और मुक्त कराया था। गुरुवार को इसी जमीन पर मृतक राम सरन दास रस्तोगी की पुत्रवधू रुक्मन रस्तोगी और पौत्र कपिल रस्तोगी को पट्टा सौंपकर वैदिक रीति-रिवाज से भूमि पूजन कराया गया।

​'इंदिरा गांधी ने सिर्फ आश्वासन दिया, योगी जी ने दिया इंसाफ'

​48 साल बाद अपनी मिट्टी पर हक पाकर मृतक के पोते कपिल रस्तोगी बेहद भावुक हो गए। उन्होंने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:

​"करीब पांच दशकों तक किसी भी सरकार ने हमारी सुध नहीं ली। उस समय केंद्र में बैठी इंदिरा गांधी की सरकार ने हमें सिर्फ खोखले आश्वासन दिए थे। लेकिन आज योगी सरकार ने हमें असली न्याय दिया है। हमारी मांग है कि हमारे दादा के हत्यारों को सख्त सजा मिले और जिस कुएं से उनका शव मिला था, उसका सौंदर्यीकरण कराकर उस चौराहे का नाम 'राम सरन दास रस्तोगी चौराहा' रखा जाए।"


​तुष्टिकरण बनाम कड़क शासन: सियासी घमासान तेज

​इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर उबाल ला दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा के एक मंच से हुंकार भरते हुए कांग्रेस और सपा को घेरा था कि 1976 और 1978 के दंगों में कई हिंदू मारे गए थे, लेकिन तत्कालीन तुष्टिकरण की राजनीति के तहत दंगाइयों के मुकदमे वापस ले लिए गए थे।

​वहीं, दूसरी तरफ जब 12 अगस्त 2025 को इस अवैध कब्जे पर बुलडोजर चला था, तो समाजवादी पार्टी के स्थानीय विधायक नवाब इकबाल महमूद ने विधानसभा में सरकार को घेरने की कोशिश की थी। लेकिन योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि तुष्टिकरण की राजनीति के दिन अब लद चुके हैं।

बेबाक 24 की दो टूक:

संभल का यह घटनाक्रम यह साबित करने के लिए काफी है कि अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर अपराधियों के सीने पर बुलडोजर बनकर चल रही है। 48 साल बाद एक पीड़ित हिंदू परिवार को न्याय मिलना यह साफ संदेश है कि देर भले हुई हो, लेकिन योगीराज में अपराधियों के अवैध साम्राज्यों को ढहाकर पीड़ितों को उनका हक वापस दिलाना तय है। अब देखना यह होगा कि मंत्री जेपीएस राठौर की इस 'जहन्नुम वाली चेतावनी' के बाद इलाके के छिपे हुए दंगाई किस बिल में जाकर छिपते हैं!



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