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बंगाल सियासी संकट: महुआ मोइत्रा की बागी विधायकों को चुनौती— "हिम्मत है तो इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ें"

by admin@bebak24.com on | 2026-06-04 20:35:42

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बंगाल सियासी संकट: महुआ मोइत्रा की बागी विधायकों को चुनौती— "हिम्मत है तो इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ें"

कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अब तक की सबसे बड़ी बगावत और आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी गुट पर तीखा हमला बोलते हुए इसे जनता के साथ 'वैचारिक विश्वासघात' करार दिया है। उन्होंने बागियों को आड़े हाथों लेते हुए साफ कहा कि ये लोग जनता के 'भाजपा विरोधी' वोट के दम पर जीतकर आए थे, लेकिन आज उसी भाजपा के पाले में जा रहे हैं।

टीएमसी में बगावत और शक्ति समीकरण

पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर हुए इस बड़े तख्तापलट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है:

- विधायकों का महा-टूट: टीएमसी के कुल 80 निर्वाचित विधायकों में से 58 विधायकों ने एकजुट होकर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथींद्रनाथ बोस के कक्ष तक मार्च किया।

- बागी गुट का नेतृत्व: इस बगावत की कमान हाल ही में टीएमसी से निष्कासित कद्दावर विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के हाथों में है।

- संवैधानिक दावा: बागी गुट का दावा है कि उनके पास दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए आवश्यक दो-तिहाई (2/3rd) से अधिक विधायकों का स्पष्ट बहुमत है। उन्होंने खुद को असली 'टीएमसी विधायक दल' घोषित करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है।


विधानसभा के भीतर सीटों का नया गणित

इस बगावत के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर विधायकों का विभाजन कुछ इस प्रकार नजर आ रहा है:


महुआ मोइत्रा के तीखे सवाल और चुनाव आयोग पर आरोप

महुआ मोइत्रा ने बागी गुट के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इन विधायकों की जीत सिर्फ और सिर्फ ममता बनर्जी के चेहरे और संघर्ष की वजह से हुई थी। टीएमसी को मिला 41 प्रतिशत वोट पूरी तरह भाजपा विरोधी जनादेश था। उन्होंने बागियों को चुनौती दी कि वे तुरंत इस्तीफा देकर 'बिजेमूल' (भाजपा-टीएमसी गठबंधन) के चुनाव चिह्न पर नए सिरे से चुनाव लड़ें।

इसके साथ ही मोइत्रा ने चुनाव आयोग (EC) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आयोग को भाजपा का मोहरा बताते हुए कहा कि चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों के एकतरफा व्यवहार और मतदाता सूची से जानबूझकर नाम हटाए जाने के कारण टीएमसी को नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, उन्होंने इस घमासान को पार्टी के लिए एक बेहतरीन 'शुद्धिकरण' (सफाई) का मौका बताया।


बेबाक टिप्पणी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 80 में से 58 विधायकों का बगावत कर जाना यह साबित करता है कि ममता बनर्जी के पैरों के नीचे से सत्ता के साथ-साथ अब उनका अपना संगठन भी पूरी तरह खिसक चुका है। महुआ मोइत्रा भले ही इसे 'शुद्धिकरण' और 'ममता ब्रांड' की दुहाई देकर संभालने की कोशिश कर रही हों, लेकिन दो-तिहाई से ज्यादा विधायकों का टूट जाना यह साफ करता है कि पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की रणनीतिक सेंधमारी बेहद गहरी और अचूक रही है।

ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा द्वारा विधानसभा के भीतर खुद को असली टीएमसी घोषित करना ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक वजूद के लिए अब तक का सबसे बड़ा संवैधानिक और कानूनी संकट है। महुआ की इस्तीफा देने की यह चुनौती केवल एक राजनीतिक बयानबाजी है, क्योंकि जमीनी हकीकत यह है कि इस वक्त संख्या बल पूरी तरह बागी गुट के पास है और विधानसभा के भीतर ममता बनर्जी अब अल्पसंख्यक नेता की भूमिका में सिमटती नजर आ रही हैं।



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