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दी को झटका! 58 विधायकों के साथ TMC में बड़ी बगावत, ऋतब्रत बने नेता

by admin@bebak24.com on | 2026-06-03 20:38:34

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दी को झटका! 58 विधायकों के साथ TMC में बड़ी बगावत, ऋतब्रत बने नेता

कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की आग आखिरकार एक बड़े विभाजन में बदल गई है। पार्टी से अलग हुए बागी धड़े ने विधानसभा के भीतर खुद को असली विधायी दल के रूप में पेश करते हुए एक नया मोर्चा खोल दिया है। इस बागी गुट ने सर्वसम्मति से ऋतब्रत बनर्जी को सदन में अपना नेता चुन लिया है। सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला जब विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने भी नियमों के तहत इस 58 सदस्यीय मजबूत गुट के दावों को हरी झंडी दे दी। इस फैसले के बाद से राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

ममता का सम्मान, पर अभिषेक बनर्जी से पूरी तरह किनारा
बागी गुट के शीर्ष नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि उनकी यह मुहिम तृणमूल कांग्रेस को बचाने की एक लोकतांत्रिक लड़ाई है। उन्होंने कहा:

"हमारा गुट पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है। हम उन्हें एक पत्र भेजकर इस नए विधायी दल का 'मुख्य सलाहकार' (Chief Advisor) बनने का ससम्मान आग्रह कर रहे हैं ताकि उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहे। लेकिन संगठन की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार अभिषेक बनर्जी की अब हमारे फैसलों में कोई भूमिका नहीं होगी।"

ऋतब्रत ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जब उन्होंने पूर्व में संगठन के भीतर फैले कथित भ्रष्टाचार को लेकर बात करनी चाही, तो उन्हें तीन दिनों तक नेतृत्व से मिलने तक नहीं दिया गया।

बागी खेमे ने स्पीकर को सौंपी नई नियुक्तियों की सूची
सदन के भीतर दो-तिहाई से अधिक (58 विधायकों) का समर्थन होने का दावा करते हुए बागी गुट ने अपने विधायी ढांचे का एलान कर दिया है, जिसे आधिकारिक तौर पर स्पीकर कार्यालय को भी भेज दिया गया है:
पदनाम
नेता, विधायी दलऋतब्रत बनर्जी
मुख्य सचेतक (Chief Whip)अखरुज्जमान
उपनेता (Deputy Leaders)जावेद अहमद खान, संदीपन साहा, सबीना यास्मीन और शिउली साहा
बागी नेता संदीपन साहा ने दावा किया कि विधानसभा परिसर में उन्हें विधायी दल का कार्यालय भी आवंटित कर दिया गया है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि जो नेतृत्व चुनावी जीत का सेहरा अपने सिर बांधता है, उसे इस ऐतिहासिक हार और आंतरिक संकट की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर लेनी होगी। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में दो और विधायक उनके साथ आ सकते हैं।

आधिकारिक टीएमसी का पलटवार: 'दबाव में कराए गए हस्ताक्षर, कानूनी लड़ाई लड़ेंगे'
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक खेमे ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा:

"पार्टी से निष्कासित या निलंबित किए गए सदस्य तकनीकी और कानूनी रूप से विधायी दल के नेता नहीं हो सकते। दोनों पक्षों की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को जो दस्तावेज सौंपे गए हैं, उनमें कई विधायकों के नाम और हस्ताक्षर कॉमन (एक जैसे) हैं। इससे साफ है कि विधायकों को भ्रमित करके या दबाव बनाकर हस्ताक्षर लिए गए हैं। हम इस मामले को लेकर संसदीय और कानूनी जांच के दायरे में जाएंगे और अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।"



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