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पर्यावरण संरक्षण की मूक साधना: गाजीपुर के 'अमितेश बाबू' सात साल से साइकिल से नाप रहे ड्यूटी की दूरी, विश्व साइकिल दिवस पर संस्था करेगी सम्मानित

by on | 2026-06-02 22:18:23

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पर्यावरण संरक्षण की मूक साधना: गाजीपुर के 'अमितेश बाबू' सात साल से साइकिल से नाप रहे ड्यूटी की दूरी, विश्व साइकिल दिवस पर संस्था करेगी सम्मानित


सन्तोष राय

गाजीपुर। बढ़ते पर्यावरणीय संकट, बेकाबू प्रदूषण और लगातार बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण महज एक विमर्श नहीं, बल्कि गंभीर धरातलीय प्रयासों की मांग करता है। इस दिशा में एक अनुकरणीय पहल करते हुए जनपद की सामाजिक संस्था शिव शिवा “स्नेह” (उपाध्यक्ष उमेश कुमार श्रीवास्तव) और उर्मिला सेवा ट्रस्ट ने वैश्विक मंच पर एक सकारात्मक संदेश देने का निर्णय लिया है।

​3 जून को आयोजित होने वाले 'विश्व साइकिल दिवस' के अवसर पर संस्था द्वारा एक ऐसे कर्मयोगी को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने आधुनिकता की चकाचौंध से दूर रहकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया है।

​सात वर्षों की मूक साधना: अमितेश सिंह का अनुकरणीय उदाहरण

​आज के दौर में जहां चंद मीटर की दूरी के लिए भी लोग ईंधन चालित वाहनों पर निर्भर हैं, वहीं गाजीपुर के अमितेश सिंह पिछले सात वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की एक मूक लेकिन बेहद प्रभावी मिसाल बने हुए हैं।

कर्तव्य और संकल्प: अमितेश सिंह स्थानीय स्नातकोत्तर (पीजी) कॉलेज में बाबू (लिपिक) के पद पर कार्यरत हैं।


दैनिक दिनचर्या: वह प्रतिदिन अपने आवास से कॉलेज ड्यूटी के लिए लगभग 4 किलोमीटर की दूरी साइकिल से ही तय करते हैं।


दीर्घकालिक प्रभाव: विगत सात वर्षों से बिना किसी व्यवधान के साइकिल का निरंतर उपयोग कर उन्होंने न केवल ईंधन की बचत की, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि व्यक्तिगत स्तर पर कार्बन फुटप्रिंट को कैसे कम किया जा सकता है।


​गरिमामयी समारोह में नकद पुरस्कार से होंगे पुरस्कृत

​अमितेश सिंह के इसी अविराम और निस्वार्थ प्रयास को रेखांकित करते हुए शिव शिवा “स्नेह” संस्था ने उन्हें सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने का निर्णय लिया है।

सम्मान राशि: संस्था की ओर से अमितेश सिंह को ₹2500 की नकद प्रोत्साहन राशि एवं सम्मान पत्र प्रदान किया जाएगा।


मुख्य अतिथि: यह सम्मान आगामी 3 जून (विश्व साइकिल दिवस) को जनपद के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. राजेश सिंह के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया जाएगा।


​संस्था का संकल्प: निरंतर जारी रहेगा प्रोत्साहन

​इस महत्वपूर्ण निर्णय की आधिकारिक जानकारी देते हुए संस्था के उपाध्यक्ष व सामाजिक कार्यकर्ता उमेश कुमार श्रीवास्तव ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर गहरी चिंता व्यक्त की।

​"जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए साइकिल जैसे पर्यावरण-अनुकूल संसाधनों को दैनिक जीवन में अपनाना अब ऐच्छिक नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। संस्था का यह प्रयास केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है, बल्कि समाज में इस गंभीर चेतना को जगाने का एक वैचारिक शंखनाद है। भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ऐसे सच्चे नायकों को संस्था निरंतर खोजकर प्रोत्साहित करती रहेगी।"

​बढ़ते कंक्रीट के जंगलों और मशीनी होती जिंदगी के बीच गाजीपुर से उठी यह आवाज निश्चित रूप से समाज के प्रबुद्ध वर्ग को आत्ममंथन करने और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने के लिए प्रेरित करेगी।



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