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भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव: वाराणसी समेत कई जिलों को मिले नए सेनापति, 2027 फतह की बिसात बिछी

by on | 2026-05-28 19:22:10

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भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव: वाराणसी समेत कई जिलों को मिले नए सेनापति, 2027 फतह की बिसात बिछी


विशेष ब्यूरो, लखनऊ/वाराणसी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्तर प्रदेश ने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपने नए जिलाध्यक्षों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी है। इस सूची में सबसे ज्यादा ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पर रहा, जहां पार्टी ने राम सकल पटेल को नया जिलाध्यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए इसे भाजपा की एक बड़ी रणनीतिक सोशल इंजीनियरिंग माना जा रहा है।

काशी से लेकर गोरखपुर तक, इन चेहरों को मिली कमान

भाजपा प्रदेश मुख्यालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, पूर्वांचल के कई अहम जिलों में फेरबदल किया गया है:

 नए जिलाध्यक्षों  के नाम 


वाराणसी : राम सकल पटेल 

चंदौली : काशीनाथ सिंह 

गोरखपुर महानगर : रमेश प्रसाद गुप्ता 

अंबेडकर नगर :दिलीप देव पटेल 

देवरिया : काली प्रसाद 

हंसराज विश्वकर्मा के 'दौर' के बाद अब नई चुनौती

वाराणसी भाजपा संगठन में लंबे समय तक हंसराज विश्वकर्मा का एकछत्र प्रभाव रहा है। वह सालों तक जिलाध्यक्ष रहे, फिर एमएलसी बने और वर्तमान में योगी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पूर्वांचल में एक मजबूत ओबीसी चेहरे के रूप में स्थापित हंसराज विश्वकर्मा के कद को देखते हुए, उनके विकल्प के रूप में राम सकल पटेल को चुनना भाजपा की दूरगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों की सुगबुगाहट: "चूंकि वाराणसी सीधे तौर पर पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए यहां का जिलाध्यक्ष सिर्फ एक संगठनात्मक पद नहीं, बल्कि दिल्ली और लखनऊ के बीच की एक बेहद मजबूत राजनीतिक कड़ी होता है। राम सकल पटेल के कंधों पर अब पीएम के क्षेत्र में संगठन को और अधिक धार देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।"

काशी क्षेत्र अध्यक्ष की कुर्सी पर भी फेरबदल की अटकलें तेज

वाराणसी जिलाध्यक्ष की घोषणा के तुरंत बाद अब राजनीतिक हलकों में काशी क्षेत्र अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म हो गया है। सूत्रों का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा संगठन में यह तो बस शुरुआत है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर पर कई और बड़े और चौंकाने वाले फेरबदल देखने को मिल सकते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी को कम किया जा सके और नए चेहरों को आगे लाया जा सके।




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