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करोड़ों की 'संगीत पथ' पर लापरवाही की ऐसी तान, सूख गई हरियाली... टूट गए अरमान!

by on | 2026-05-28 07:35:09

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करोड़ों की 'संगीत पथ' पर लापरवाही की ऐसी तान, सूख गई हरियाली... टूट गए अरमान!


वाराणसी। ​कहते हैं काशी की सुबह में एक अलग संगीत होता है, लेकिन वाराणसी के सेंट्रल जेल मार्ग पर प्रशासन ने जो करोड़ों की लागत से 'संगीत पथ' सजाया था, आज उसकी धुन पूरी तरह बिगड़ चुकी है। काशी को चमकाने और राहगीरों को सुकून देने के दावों के साथ दो साल पहले जिस पाथवे को खड़ा किया गया था, आज वो नगर निगम और वीडीए (VDA) की उदासीनता की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।

​प्रचंड गर्मी का टॉर्चर तो अपनी जगह है, लेकिन इस पाथवे की जो दुर्गति हुई है, उसकी असली विलेन सरकारी महकमों की 'लापरवाही की आंच' है।

​ दावों में 'अमृत', हकीकत में 'सूखा': ये हैं जमीनी हालात

​दो बेबाक 24 की टीम ने जब इस तथाकथित संगीत पथ का जायजा लिया, तो तस्वीरें दिल दुखाने वाली थीं। दो साल पहले जो पौधे काशी की जीवंतता और हरियाली की कहानी बयां करते थे, आज वो पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसकर दम तोड़ चुके हैं।

ठूंठ बन चुकी हरियाली: कीमती और खूबसूरत पौधे पानी के अभाव में पूरी तरह सूख चुके हैं।


मलबे में तब्दील हुए गमले: पाथवे पर सलीके से रखे गए लाखों के गमले अब टूट-फूट कर बिखर चुके हैं।


औंधे मुंह गिरे संसाधन: कई गमले तो फुटपाथ पर औंधे मुंह पड़े हैं, मानो वो खुद को इस बदहाली से मुक्त कर कचरे की गाड़ी में फेंके जाने का इंतजार कर रहे हों।


​  बेबाक 24 के तीखे सवाल: जनता का पैसा, पानी में क्यों?

बड़ा सवाल यह है कि जब बजट पास करना होता है, तो फाइलें रॉकेट की रफ्तार से दौड़ती हैं। लेकिन जब उन करोड़ों के संसाधनों को जिंदा रखने के लिए दो बाल्टी पानी की जरूरत होती है, तो सारे टैंकर सूखे क्यों पड़ जाते हैं?

​स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों का कहना है:

"शुरुआत में लगा कि काशी को एक बेहतरीन तोहफा मिला है, लेकिन अब यह पाथवे सुंदरता नहीं, बल्कि प्रशासन की नाकामी का विज्ञापन बन गया है। इस तपती गर्मी में पौधों को पानी देने वाला कोई नहीं है।"

​ पर्यावरण प्रेमियों की चेतावनी: समय रहते जागिए प्रशासन!

​वाराणसी के पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने अब सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उनका साफ कहना है कि अगर समय रहते इस पाथवे की सुध नहीं ली गई, तो जनता की गाढ़ी कमाई का करोड़ों रुपया तो मिट्टी में मिलेगा ही, साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचेगा।

बेबाक 24 का टेक:

सिर्फ उद्घाटन के पत्थर गाड़ देने से शहर स्मार्ट नहीं बनते, साहब! स्मार्टनेस तब दिखती है जब बनाए गए प्रोजेक्ट्स का रखरखाव हो। नगर निगम और वीडीए को अपनी नींद तोड़नी होगी। यदि प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर अब भी कमान नहीं संभालेंगे, तो यह 'संगीत पथ' हमेशा के लिए बेसुरा हो जाएगा।

​काशी की हरियाली को बचाने के लिए क्या जिम्मेदार अधिकारी अब भी कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर कागजी दावों के पीछे ही छिपे रहेंगे? जवाब का इंतजार रहेगा!



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