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22 राजभरों की हत्या के पोस्टर पर बिफरे ओम प्रकाश राजभर: बोले- "दम है तो कातिलों के नाम भी लिखो, क्योंकि वो..."

by on | 2026-05-28 07:14:05

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22 राजभरों की हत्या के पोस्टर पर बिफरे ओम प्रकाश राजभर: बोले- "दम है तो कातिलों के नाम भी लिखो, क्योंकि वो..."


लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में 'पोस्टर वॉर' कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार लखनऊ की सड़कों पर एक ऐसे पोस्टर ने दस्तक दी है जिसने सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) दफ्तर के बाहर लगे एक विवादित पोस्टर पर अब योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर का गुस्सा फूट पड़ा है। राजभर ने सपा को सीधे ललकारते हुए कहा है कि अगर दम है, तो पोस्टर पर कातिलों के नाम भी लिखो!

​22 लाशें, 7 जिले और सपा का 'पोस्टर दांव'

​दरअसल, पूरा बखेड़ा लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर लगे एक भारी-भरकम बैनर से शुरू हुआ। सपा नेता पंकज राजभर द्वारा लगवाए गए इस पोस्टर में दावा किया गया है कि भाजपा सरकार के दौरान (साल 2024 से 2026 के बीच) राजभर समाज के लोगों की ताबड़तोड़ हत्याएं हुई हैं।

​इस पोस्टर में वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, बाराबंकी और कुशीनगर समेत कई जिलों के करीब 22 मृतकों की सूची जारी की गई है। सपा का सीधा मकसद यह दिखाना था कि बीजेपी राज में राजभर समाज सुरक्षित नहीं है और उनके हक की बात करने वाले मंत्री जी खामोश हैं। लेकिन, सपा का यह दांव तब उल्टा पड़ गया जब खुद ओपी राजभर ने फ्रंट फुट पर आकर बैटिंग शुरू कर दी।

​"अगर मर्द हो... तो हत्यारों के नाम भी छापो": राजभर का तीखा पलटवार

​सपा के इस पोस्टर पर बिफरते हुए ओपी राजभर ने बेहद तल्ख लहजे में कहा:

​"सपा के लोग सिर्फ लाशों की गिनती मत दिखाएं। यह भी बताएं कि इन 22 राजभरों को मारा किसने? अगर पोस्टर लगाने वालों में दम है, वो मर्द हैं, तो पोस्टर पर हत्यारों का नाम भी साफ-साफ लिखें। सच तो यह है कि इनमें से ज्यादातर कातिल यादव बिरादरी के हैं।"

​राजभर ने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि बाराबंकी में एक गरीब राजभर लड़का बर्फ बेच रहा था, जब उसने अपने पैसे मांगे तो उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। मऊ और कौशाम्बी में भी ऐसी ही खौफनाक वारदातें हुईं। उन्होंने साफ कहा कि सपा सिर्फ लाशों पर राजनीति करना बंद करे और सच बोलने का माद्दा दिखाए।

​अखिलेश के PDA पर सबसे बड़ा तंज: "पहला दावा अहिर... वो भी सैफई वाले!"

​ओपी राजभर सिर्फ पोस्टर विवाद पर ही नहीं रुके, उन्होंने अखिलेश यादव के सबसे बड़े सियासी हथियार 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के गुब्बारे की भी हवा निकाल दी। राजभर ने तंज कसते हुए PDA की एक नई परिभाषा गढ़ दी:

P - पहला


D - दावा


A - अहिर (और वो भी सिर्फ सैफई परिवार का!)


ओपी राजभर का सीधा सवाल:
"वोट सबको चाहिए, लेकिन मलाईदार कुर्सी सिर्फ सैफई

राजभर ने आरोप लगाया कि अगर पिछड़ों और बहुजनों के नाम पर पहले ठगी न हुई होती, तो आज उन्हें सुभासपा जैसी पार्टी बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने सीधे अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा, "आजमगढ़ का कोई आम यादव कभी सांसद नहीं बन सकता, वहां सिर्फ धर्मेंद्र यादव ही चुनाव लड़ेंगे। बदायूं से आदित्य यादव और कन्नौज से डिंपल यादव की जगह किसी राजभर, चौहान, निषाद, मौर्य या पाल समाज के नेता को टिकट क्यों नहीं दिया गया?"



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