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बैंक खातों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो शातिर गिरफ्तार

by on | 2026-05-27 17:53:36

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बैंक खातों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो शातिर गिरफ्तार

वाराणसी। जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले साइबर ठगों के खिलाफ वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम टीम को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने बैंक खातों से धोखाधड़ी कर लाखों रुपये पार करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर अपराधियों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन, फर्जी व कूटरचित आधार कार्ड और नकदी बरामद हुई है।

​12 लाख की ठगी के बाद एक्शन में आई पुलिस

​मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि बीते 24 मई 2026 को मूल रूप से बलिया के रहने वाले और वर्तमान में वाराणसी पुलिस लाइन के इंजीनियर हाल में रह रहे शिवदत्त हरिजन ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के मुताबिक, शातिर ठगों ने उनके बैंक खाते में सेंध लगाकर अवैध रूप से 12 लाख रुपये उड़ा दिए थे। मामला हाईप्रोफाइल होते ही साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

​पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के सख्त निर्देश पर डीसीपी अपराध के नेतृत्व और एसीपी साइबर अपराध विदुष सक्सेना की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने डिजिटल फुटप्रिंट्स और सर्विलांस की मदद से जाल बिछाया और 27 मई को वाराणसी से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

​गाजीपुर और बलिया के रहने वाले हैं शातिर ठग

​पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान सुरेंद्र कुमार (निवासी मोहम्मदाबाद, गाजीपुर) और विनय कुमार (निवासी बलिया) के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में इन शातिरों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। इनके खिलाफ पहले से भी साइबर अपराध के कई मामले दर्ज हैं।

​सिम स्वैपिंग और फर्जी दस्तावेजों का खौफनाक खेल

​पुलिस पड़ताल में इस गिरोह के काम करने के बेहद शातिराना तरीके (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है:

  • सिम स्वैपिंग (Sim Swapping): यह गिरोह सबसे पहले टारगेट किए गए व्यक्ति के बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर को अपना निशाना बनाता था। झांसा देकर, चोरी से या फिर 'सिम अपडेट' करने के बहाने ये लोग असली सिम को बंद करवाकर उसी नंबर का दूसरा सिम (स्वैप) एक्टिवेट करा लेते थे।
  • यूपीआई का अवैध एक्सेस: मोबाइल नंबर हाथ में आते ही आरोपी PayTM, PhonePe, Google Pay (G-Pay) और Mobikwik जैसे यूपीआई ऐप्स को अपने फोन में एक्टिवेट कर लेते थे। इसके बाद खाते की पूरी रकम पर इनका नियंत्रण हो जाता था।
  • फर्जी आईडी से कैश निकासी: बैंक से रकम उड़ाने के बाद ये लोग फर्जी आधार कार्ड और जाली पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते थे ताकि विभिन्न ग्राहक सेवा केंद्रों (CSP Centers) से आसानी से नकदी निकाल सकें। कैश निकालने के बाद रकम आपस में बांट ली जाती थी।

​इस टीम ने किया गिरोह का सफाया

​इस शातिर गिरोह को बेनकाब करने वाली टीम में साइबर क्राइम थाने के निरीक्षक योगेंद्र प्रसाद, निरीक्षक विजय नारायण मिश्र, उपनिरीक्षक संजीव कन्नौजिया, और उपनिरीक्षक आलोक रंजन सिंह सहित पूरी साइबर टीम शामिल रही, जिनकी त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है।

बेबाक 24 की अपील: साइबर ठगों के हौसले बुलंद हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने सिम कार्ड को अपडेट न करें, न ही कोई ओटीपी शेयर करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।



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