by on | 2026-05-26 16:29:25
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दिल्ली : भारतीय सेना की सामरिक तैयारियों और सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। २६ मई २०२६ को चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन स्थित मुख्यालय पश्चिमी कमान में नए चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही (पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम) ने औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण कर लिया।
उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा का स्थान लिया है, जिन्हें सेना मुख्यालय में महानिदेशक रणनीतिक योजना (Director General Strategic Planning) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं नीति-निर्धारक पद पर नियुक्त किया गया है। सैन्य दृष्टिकोण से लेफ्टिनेंट जनरल साही की यह नियुक्ति अत्यंत गंभीर और दूरगामी प्रभाव वाली मानी जा रही है, जिसके प्रमुख रणनीतिक बिंदु निम्नलिखित हैं:
व्यापक परिचालन अनुभव और विशिष्ट सैन्य सफर
द पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा तथा भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून के पूर्व छात्र रहे लेफ्टिनेंट जनरल साही को दिसंबर १९८८ में राजपूत रेजिमेंट की २३वीं बटालियन में कमीशन मिला था। वर्तमान में वे राजपूत रेजिमेंट के कर्नल के प्रतिष्ठित पद पर आसीन हैं। उनका सैन्य करियर अग्रिम मोर्चों पर नेतृत्व करने का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर जैसे अत्यधिक विषम वातावरण के साथ-साथ देश के उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी कमानों के परिचालन क्षेत्रों में लंबे समय तक सेवाएं दी हैं। इसके अतिरिक्त, जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर अपनी बटालियन और काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (किलो) में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभालकर उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों को कुशलतापूर्वक अंजाम दिया।
संकट काल में कुशल नेतृत्व और रणनीतिक नियंत्रण
जनरल अधिकारी को भारतीय सेना की सबसे बड़ी कोर—३ कोर—का नेतृत्व करने का गौरव प्राप्त है। इस कोर की जिम्मेदारी पूर्वी सीमाओं, भारत-म्यांमार सीमा तथा उत्तर-पूर्व के छह राज्यों के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को संभालने की है। मई २०२३ में मणिपुर में उपजे गंभीर जातीय संघर्ष के दौरान, उन्होंने अपने परिचालन क्षेत्र में न केवल कानून-व्यवस्था को स्थिर करने में सफलता पाई, बल्कि बुनियादी सैन्य और नागरिक अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के उन्नयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सैन्य आधुनिकीकरण एवं सूचना युद्ध के विशेषज्ञ
सैन्य अभियानों के साथ-साथ जनरल साही का योगदान सैन्य शिक्षा और आधुनिक युद्ध तकनीकों के एकीकरण में अतुलनीय रहा है। इस नियुक्ति से पूर्व, आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट के रूप में उन्होंने उभरती परिचालन आवश्यकताओं और तकनीकी प्रगति के अनुरूप पेशेवर सैन्य शिक्षा को नया स्वरूप दिया। उनके इसी उत्कृष्ट नेतृत्व के कारण संस्थान को १५ जनवरी २०२६ को प्रतिष्ठित “चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ यूनिट अप्रिसिएशन” से सम्मानित किया गया। वे एक ऑपरेशनल कोर के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ, अतिरिक्त महानिदेशक सैन्य संचालन (एडीजीएमओ) और सेना मुख्यालय में महानिदेशक सूचना युद्ध (डीजी इंफॉर्मेशन वॉरफेयर) जैसी उच्च-स्तरीय नियुक्तियों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
विशिष्ट सैन्य अलंकरण एवं अकादमिक योग्यता
लेफ्टिनेंट जनरल साही का सैन्य जीवन देश के सर्वोच्च पदकों और उत्कृष्ट अकादमिक योग्यताओं से परिपूर्ण है:
सैन्य सम्मान (Medals): परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM), युद्ध सेवा मेडल (YSM) तथा सेना मेडल (SM)।
शैक्षणिक योग्यता (Qualifications): डीएसएससी, वेलिंगटन से स्टाफ कोर्स; आर्मी वॉर कॉलेज, महू से हायर कमांड कोर्स; राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली से एनडीसी कोर्स; रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में मास्टर डिग्री और दो एमफिल (M.Phil) डिग्रियां।
भावी दिशा और संकल्प
पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद लेफ्टिनेंट जनरल साही ने 'वीर स्मृति' युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। नए चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्यभार संभालते ही जनरल अधिकारी ने अपनी प्राथमिकताओं को पूरी तरह रेखांकित कर दिया है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए उनकी मुख्य प्राथमिकताएं परिचालन तत्परता (Operational Readiness) को उच्चतम स्तर पर बनाए रखना, क्षमता विकास (Capability Development) को गति देना, तथा सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों (Veterans) एवं उनके परिवारों के कल्याण को सुनिश्चित करना है।
पश्चिमी सीमाओं पर उभरती सुरक्षा चुनौतियों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल साही का यह नेतृत्व कमान की रणनीतिक और युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प प्रस्तुत करता है। 'हर काम देश के नाम' का आदर्श वाक्य इस नेतृत्व परिवर्तन की गंभीरता और निष्ठा को पूरी तरह परिलक्षित करता है।
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