ब्रेकिंग न्यूज़
सोमनाथ में श्रद्धा और शक्ति का सैलाब: पीएम मोदी ने डमरू बजाकर और त्रिशूल थामकर किया 'शौर्य यात्रा' का शंखनाद
राजनीति राजनीति

यूपी पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बना योगी सरकार ने तोड़ी पुरानी परंपरा, बड़े फैसलों के लिए करना होगा यह काम

by on | 2026-05-26 14:17:04

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3215


यूपी पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बना योगी सरकार ने तोड़ी पुरानी परंपरा, बड़े फैसलों के लिए करना होगा यह काम

लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार अब नहीं थमेगी। पंचायत चुनाव में संभावित देरी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही अगले 6 महीने तक प्रशासक (Administrator) बनाए जाने को मंजूरी दे दी है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के निर्देश पर प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।

बुधवार से संभालेंगे जिम्मेदारी, नहीं रुकेंगे विकास कार्य

​शासनादेश के अनुसार, बुधवार से प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधान ही प्रशासक के तौर पर कमान संभालेंगे। इस फैसले से गांवों में चल रहे जरूरी विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। गांवों में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, मनरेगा के तहत रोजगार, सड़क मरम्मत और अन्य बुनियादी योजनाएं पहले की तरह ही सुचारू रूप से जारी रहेंगी। सरकार का मानना है कि पंचायतों में प्रशासनिक शून्यता आने से ग्रामीण विकास पूरी तरह ठप हो सकता था, जिससे बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।

आरक्षण प्रक्रिया बनी देरी की वजह, 2027 चुनाव के बाद संभव हैं पंचायत चुनाव

​उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने की सबसे बड़ी वजह आरक्षण प्रक्रिया को माना जा रहा है। पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने में अभी और समय लगेगा। यही कारण है कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि अब पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जा सकते हैं।

डीएम को मिला अधिकार, लेकिन वित्तीय फैसलों पर रहेगी 'सख्ती'

​सरकारी आदेश के मुताबिक, मंगलवार को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होते ही जिलाधिकारी (DM) संबंधित ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नामित करेंगे। हालांकि, इस बार प्रशासकों के अधिकार पहले जैसे असीमित नहीं रहेंगे।

ध्यान दें: निवर्तमान प्रधान केवल सामान्य और रोजमर्रा के कार्यों को ही संचालित कर सकेंगे। किसी भी बड़े वित्तीय या नीतिगत फैसले के लिए उन्हें जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) के माध्यम से जिलाधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।


जुलाई में क्षेत्र और जिला पंचायतों का भी खत्म होगा कार्यकाल

​प्रदेश में केवल ग्राम पंचायतों का ही नहीं, बल्कि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के अन्य दोनों स्तरों का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने जा रहा है:

  • ग्राम पंचायतें: कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है।
  • जिला पंचायतें: कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त होगा।
  • क्षेत्र पंचायतें (बीडीसी): कार्यकाल 19 जुलाई तक रहेगा।

​माना जा रहा है कि जुलाई में क्षेत्र और जिला पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने पर वहां भी इसी तरह प्रशासकों की नियुक्ति की जा सकती है।

टूट गई सालों पुरानी परंपरा

​उत्तर प्रदेश के पंचायत इतिहास में यह एक बड़ा बदलाव है। अब तक की परंपरा यह रही है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद सहायक विकास अधिकारी (ADO Panchayat) को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। लेकिन सरकारी अधिकारियों के पास अत्यधिक कार्यभार होने के कारण गांवों का विकास प्रभावित होता था।

​राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि गांवों के विकास की निरंतरता बनाए रखने के लिए मौजूदा प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंपी जाए। योगी सरकार ने जनप्रतिनिधियों के इस अनुभव पर भरोसा जताते हुए पुरानी परंपरा को बदल दिया है। सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रधान गांवों की जमीनी जरूरतों और चल रही योजनाओं से बेहतर तरीके से वाकिफ हैं, इसलिए उनके रहते व्यवस्था सुचारू बनी रहेगी।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment