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दबंगई के आगे सिस्टम लाचार! पूर्व प्रधान ने तीन बार दी 'तहसील दिवस' पर दस्तक, पर सरकारी जमीन से नहीं हटा अवैध कब्जा

by on | 2026-05-26 13:46:38

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दबंगई के आगे सिस्टम लाचार! पूर्व प्रधान ने तीन बार दी 'तहसील दिवस' पर दस्तक, पर सरकारी जमीन से नहीं हटा अवैध कब्जा

चुनार (मीरजापुर)। उत्तर प्रदेश सरकार भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी प्रशासनिक उदासीनता और दबंगों के गठजोड़ की गवाही दे रही है। ताजा मामला मीरजापुर जनपद के चुनार तहसील अंतर्गत मौजा बरूईया का है, जहां सार्वजनिक नाली और चकमार्ग (रास्ता) पर इलाके के रसूखदार दबंगों ने जबरन कब्जा कर उसका अस्तित्व ही मिटा दिया है। हैरानी की बात यह है कि गांव के पूर्व प्रधान द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बाद भी तहसील प्रशासन मौन साधे बैठा है।

​ तीन बार 'तहसील दिवस' में गुहार, नतीजा सिफर

​मामला तब तूल पकड़ा जब ग्राम-घरवासपुर के निवासी और पूर्व प्रधान जयनरायण सिंह (पुत्र स्व. दानबहादुर सिंह) ने थक-हारकर उपजिलाधिकारी (SDM) चुनार को एक और लिखित शिकायती पत्र सौंपकर मामले से अवगत कराया। पीड़ित पूर्व प्रधान ने पत्र में साफ तौर पर दर्ज किया है कि वह इस गंभीर मामले को लेकर 07 जनवरी 2026, 17 जनवरी 2026 और 04 अप्रैल 2026 को तीन बार 'तहसील दिवस' में लिखित प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। लेकिन तीन-तीन बार मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट 'तहसील दिवस' में शिकायत दर्ज होने के बावजूद चुनार तहसील प्रशासन ने जमीन को कब्जा मुक्त कराने की जहमत नहीं उठाई।

​ आराजी संख्या 235, 241 और 303 पर 'दबंग राज'

​शिकायती पत्र के अनुसार, मौजा बरूईया (परगना-हवेली, तहसील-चुनार) में स्थित आराजी संख्या 235 व 241 (सार्वजनिक नाली) और आराजी संख्या 303 (सुरक्षित चकमार्ग/रास्ता) पर दबंगों की नजर पड़ गई।

आरोप है कि परोरवा (थाना-रामनगर, जिला-वाराणसी) निवासी घुरैलाल (पुत्र स्व. शिवदास) और घरवासपुर (मीरजापुर) निवासी शशांक सिंह व आशीष सिंह (दोनों पुत्र स्व. श्रीकान्त शर्मा) आदि ने मिलकर इस सार्वजनिक भूमि को जबरन खोदकर अपनी निजी जमीन में मिला लिया।


​दबंगों ने न सिर्फ नाली और रास्ते का वजूद मिटा दिया, बल्कि उस सरकारी जमीन पर अवैध रूप से फसल भी उगा दी।


बड़ा संकट: नाली को जबरन बांधकर अवरुद्ध करने के कारण पूर्व प्रधान जयनरायण सिंह की कई बीघा फसल जलमग्न होकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। यही नहीं, इस नाली और रास्ते के बंद होने से इलाके के अन्य दर्जनों किसानों की सिंचाई और आवागमन का रास्ता भी पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे किसानों को अपूरणीय क्षति हो रही है।

​ एसडीएम ने मार्क की फाइल, अब कार्रवाई का इंतजार

​लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, शिकायती पत्र पर 20 अप्रैल 2026 की तारीख में प्रशासनिक हलचल देखने को मिली है। पत्र पर उच्च अधिकारियों द्वारा 'SHO अदलहाट' और 'RI/लेखपाल' को जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई (वि. भा. का.) के लिए निर्देशित किया गया है। मौके पर पैमाइश (सीमांकन) कर कब्जा मुक्त कराने के निर्देश तो दे दिए गए हैं, लेकिन सवाल वही है कि क्या यह निर्देश कागजों से निकलकर जमीन पर उतरेंगे?

​जब एक पूर्व जनप्रतिनिधि (पूर्व प्रधान) को अपनी और गांव की साझा समस्या के लिए चार महीने में तीन बार तहसील दिवस के चक्कर काटने पड़ें और चौथी बार सीधे एसडीएम की चौखट पर गुहार लगानी पड़े, तो आम जनता के हाल का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। वाराणसी और मीरजापुर की सरहद पर सक्रिय ये दबंग कानून को ठेंगा दिखाकर किसानों का हक मार रहे हैं। अब देखना यह है कि चुनार पुलिस और राजस्व टीम इस मामले में कब तक सीमांकन कराकर सरकारी नाली और चकमार्ग को मुक्त कराती है, या फिर यह फाइल भी पुराने प्रार्थना पत्रों की तरह ठंडे बस्ते के हवाले कर दी जाएगी!



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