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गन कल्चर पर हाईकोर्ट का हंटर: राजा भैया, विनीत सिंह, अब्बास समेत कई बाहुबलियों की कुंडली तलब; बेबाक 24 की स्पेशल रिपोर्ट

by on | 2026-05-22 15:51:47

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गन कल्चर पर हाईकोर्ट का हंटर: राजा भैया, विनीत सिंह, अब्बास समेत कई बाहुबलियों की कुंडली तलब; बेबाक 24 की स्पेशल रिपोर्ट

लखनऊ/वाराणसी: उत्तर प्रदेश में रसूख, रूतबे और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'गन कल्चर' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। आपराधिक पृष्ठभूमि के बावजूद धड़ल्ले से बाहुबलियों और उनके करीबियों को बांटे गए असलहा लाइसेंसों को लेकर कोर्ट ने न केवल प्रदेश सरकार बल्कि जिला प्रशासनों की लचर कार्यप्रणाली को भी सरेआम कठघरे में खड़ा कर दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में शस्त्र अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

​10 लाख से ज्यादा लाइसेंस, 6 हजार से अधिक अपराधियों के हाथ में 'सरकारी बंदूक'

​अदालत के सामने आए सरकारी हलफनामे के आंकड़े चौंकाने वाले भी हैं और डराने वाले भी। उत्तर प्रदेश में इस समय कुल 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस सक्रिय हैं। लेकिन सबसे गंभीर और बेबाक सच यह है कि इनमें से 6,062 लाइसेंस ऐसे लोगों के पास हैं, जिन पर दो या दो से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीधा सवाल दागा है कि आखिर किन परिस्थितियों और किस राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में इन अपराधियों को कानूनन हथियार रखने की खुली छूट दी गई?

​पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक... रसूखदारों की लिस्ट तलब

​हाईकोर्ट ने नोएडा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जोन के कमिश्नरों और जिलाधिकारियों को सीधे निशाने पर लिया है। कोर्ट ने प्रदेश के कई सबसे रसूखदार और चर्चित चेहरों का पूरा आपराधिक इतिहास, उन्हें मिले शस्त्र लाइसेंस और शासन-प्रशासन द्वारा दिए गए सुरक्षा विवरण (Security Detail) की पूरी कुंडली तलब कर ली है।

इन प्रमुख नामों पर टिकी हैं अदालत की नजरें:

वाराणसी व पूर्वांचल जोन: त्रिभुवन सिंह , पवन सिंह, विजय मिश्रा, कुंटू सिंह, अखंड प्रताप सिंह, अब्बास अंसारी और पिंटू सिंह।


अन्य चर्चित नाम: रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, धनंजय सिंह, बृजभूषण सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह और उपेंद्र सिंह गुड्डू।


​अदालत ने साफ कहा है कि इन सभी प्रभावशाली लोगों के लाइसेंसों की गहन जांच हो कि क्या इन्हें जारी करते समय तय नियमों का पालन हुआ था या सिर्फ रसूख देखकर फाइलें आगे बढ़ा दी गईं।

​"हथियारों का प्रदर्शन समाज में भय का माहौल पैदा करता है"

​सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन करना, सोशल मीडिया पर रील्स बनाना या भारी-भरकम काफिलों में उनका रौब दिखाना समाज में केवल भय और असुरक्षा की भावना पैदा करता है। यह स्थिति सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था के लिए एक सीधा और गंभीर खतरा है, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

​अधिकारियों को दो टूक: जानकारी छिपाई तो नपेंगे जिलाधिकारी और कप्तान

​अदालत ने इस मामले में प्रशासनिक हीलाहवाली या 'मैनेजमेंट' की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर दी है। सभी जिलाधिकारियों (DM), पुलिस कमिश्नरों और कप्तानों (SSP) को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि बाहुबलियों के रिकॉर्ड को लेकर कोई भी तथ्य छिपाया न जाए। कोर्ट ने सीधे लहजे में चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्तर पर जानकारी को दबाने या अदालत में गलत हलफनामा पेश करने की पुष्टि हुई, तो संबंधित जिले के आला अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तय है।

​अब इस पूरे रसूखदार तंत्र और गन कल्चर पर अगली बड़ी और निर्णायक सुनवाई 26 मई 2026 को होगी। देखना होगा कि इस बार रसूखदारों को बचाने वाला प्रशासन कोर्ट के हंटर के सामने क्या जवाब पेश करता है। हर अपडेट पर बनी रहेगी बेबाक नजर।



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