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RELOS समझौता प्रभावी: भारत और रूस एक-दूसरे की धरती पर तैनात करेंगे 3000 सैनिक; मरमांस्क से हिंद महासागर तक बढ़ेगी सैन्य ताकत

by on | 2026-04-20 13:22:10

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RELOS समझौता प्रभावी: भारत और रूस एक-दूसरे की धरती पर तैनात करेंगे 3000 सैनिक; मरमांस्क से हिंद महासागर तक बढ़ेगी सैन्य ताकत

नई दिल्ली | भारत और रूस के बीच फरवरी 2025 में हस्ताक्षरित 'परस्पर रसद आदान-प्रदान समझौता' (RELOS) आज से प्रभावी हो गया है। यह समझौता न केवल रसद (Logistics) तक सीमित है, बल्कि इसमें पहली बार सैनिकों और लड़ाकू विमानों की तैनाती का बड़ा प्रावधान शामिल है।

​समझौते की 3 बड़ी बातें 

• ​सैनिकों की तैनाती: भारत और रूस अब एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, बंदरगाहों और वायु सेना स्टेशनों पर 3,000-3,000 सैनिक तैनात कर सकेंगे।
• ​युद्धपोत और विमान: दोनों देश एक-दूसरे के बेस पर 5 युद्धपोत और 10 लड़ाकू विमान तैनात करने पर सहमत हुए हैं।
​• आर्कटिक में भारत की एंट्री: इस समझौते के जरिए भारत को रूस के मरमांस्क और सेवेरोमोर्स्क जैसे विशाल बंदरगाहों तक पहुँच मिलेगी, जिससे आर्कटिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी।

​अमेरिका के 'लेमोआ' (LEMOA) से कितना अलग?

​भारत का अमेरिका के साथ भी रसद समझौता है, लेकिन रूस के साथ यह डील अधिक गहरी है:

​• सैनिकों का प्रावधान: अमेरिका के साथ समझौते में सैनिकों की स्थायी या सामरिक तैनाती का प्रावधान नहीं है, जबकि रूस के साथ यह मुख्य हिस्सा है।

​• वस्तु विनिमय (Barter): RELOS के तहत सेवाओं के बदले नकद भुगतान के बजाय वस्तुओं का आदान-प्रदान (Barter System) भी संभव है।

​ S-400 मिसाइल सिस्टम: दुश्मन सावधान!

​रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने अतिरिक्त S-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणालियों को मंजूरी दे दी है।

​• अपडेट: रूस से चौथी बैटरी का अंतिम परीक्षण चल रहा है, जो जून 2026 तक भारत पहुँच जाएगी।

• ​लक्ष्य: 2026 के अंत तक भारत के पास सभी 5 शक्तिशाली S-400 बैटरियाँ होंगी, जो आसमान में अभेद्य कवच की तरह काम करेंगी।



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