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अलविदा गोपेश जी: बनारस ने खोया पत्रकारिता का 'अक्खड़' और 'ईमानदार' चेहरा, सत्ता के आगे कभी नहीं झुकी जिसकी कलम!

by on | 2026-01-15 15:49:43

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अलविदा गोपेश जी: बनारस ने खोया पत्रकारिता का 'अक्खड़' और 'ईमानदार' चेहरा, सत्ता के आगे कभी नहीं झुकी जिसकी कलम!

​वाराणसी। बनारस की गलियों में गूंजने वाली बेबाक पत्रकारिता की एक बुलंद आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। वरिष्ठ पत्रकार गोपेश पाण्डेय का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि उस दौर का अंत है जहाँ पत्रकारिता 'दलाली' नहीं, 'दायित्व' हुआ करती थी। काशी के पत्रकारिता जगत में आज जो सन्नाटा है, वह उनकी ईमानदारी और सिद्धांतों की गवाही दे रहा है।
​सत्ता की हनक और पद का लोभ... सब उनकी कलम के आगे बौने थे
​गोपेश पाण्डेय उस कतार के पत्रकार थे, जिन्होंने कभी 'मैनेजमेंट' के दबाव में खबर नहीं बदली। उन्होंने सिखाया कि पत्रकार का काम सत्ता की जी-हुजूरी करना नहीं, बल्कि उसे आइना दिखाना है। काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पत्रकारों के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ी। आज के दौर में जब कलम झुकने के बहाने ढूंढती है, गोपेश पाण्डेय का नाम एक ढाल बनकर याद आता है।
​नम आंखों से विदाई: 'खबर' से पहले 'इंसानियत' को रखा ऊपर
​मंगलवार को काशी पत्रकार संघ में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि गोपेश जी ने संपत्ति नहीं, 'सम्मान' कमाया था। सभा में मौजूद राजनीति, शिक्षा और समाजसेवा के दिग्गजों की आंखों में नमी थी।
​अध्यक्षता: अरुण मिश्र (अध्यक्ष, काशी पत्रकार संघ)
​संचालन: जितेन्द्र श्रीवास्तव (महामंत्री)
​प्रमुख उपस्थिति:पूर्व महामंत्री अखिलेश मिश्र, एमएलसी धर्मेन्द्र राय, प्रो. राममोहन पाठक, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल सहित पत्रकारिता जगत के तमाम दिग्गज।
​अब 'गोपेश पाण्डेय स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित होंगे निर्भीक कलमकार
​गोपेश जी की विरासत को जिंदा रखने के लिए एक बड़ी घोषणा भी हुई। प्रो. क्षेमेन्द्र मणि त्रिपाठी ने ऐलान किया कि उनके पिता स्व. प्रो. हरिहर नाथ त्रिपाठी की जयंती पर हर साल 'पंडित गोपेश पाण्डेय स्मृति पुरस्कार' दिया जाएगा। यह उन पत्रकारों के लिए संबल बनेगा जो आज भी सच बोलने का साहस रखते हैं।



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