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सोनभद्र नरसंहार: मौत की खदानों का 'किंगपिन' अभिषेक सिंह काके फिर रडार पर, SIT ने कसा पांच गुप्त पार्टनरों पर शिकंजा

by on | 2026-01-13 20:13:45

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सोनभद्र नरसंहार: मौत की खदानों का 'किंगपिन' अभिषेक सिंह काके फिर रडार पर, SIT ने कसा पांच गुप्त पार्टनरों पर शिकंजा


ओबरा (सोनभद्र) |

विशेष रिपोर्ट: अजय सिंह

एशिया की 'ऊर्जा राजधानी' को मजदूरों की कब्रगाह बनाने वाले रसूखदारों के दिन अब लदने वाले हैं। बिल्ली-मारकुंडी के 'कृष्णा माइनिंग वर्क्स' में 15 नवंबर को हुए उस भयावह मंजर को कोई नहीं भूला है, जिसमें सात मजदूरों की जिंदगियां पत्थर के नीचे दफन हो गई थीं। अब इस मामले में बेबाक 24 के खुलासे और पुलिसिया तफ्तीश ने खनन माफियाओं की नींद उड़ा दी है।

जांच में सबसे चौंकाने वाला नाम अभिषेक सिंह उर्फ काके का सामने आया है। यह वही नाम है जो सोनभद्र के पिछले कई खनन हादसों का मास्टरमाइंड रहा है। एसआईटी की जांच में पांच गुप्त पार्टनरों के नाम उजागर हुए हैं, जिनमें मुन्ना राय मेडिकल और तीन अन्य रसूखदारों को नामजद किया गया है।

कुर्की की तैयारी: धारा 82 लागू, 83 का काउंटडाउन शुरू

मुख्य आरोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख मधुसूदन सिंह और दिलीप केसरी अभी भी पुलिस के साथ 'चूहों-बिल्ली' का खेल खेल रहे हैं। लेकिन कानून के हाथ अब उनकी गर्दन तक पहुँच चुके हैं। सीओ  हर्ष पांडेय ने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपियों के खिलाफ धारा 82 (उद्घोषणा) की कार्रवाई पूरी हो चुकी है और अब अगली कड़ी में धारा 83 (संपत्ति की कुर्की) की तैयारी है। एसआईटी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चाहे अपराधी पाताल में ही क्यों न छुपा हो, उसे घसीटकर बाहर लाया जाएगा।

सियासी संरक्षण और एनजीटी का डंडा

एक तरफ जहां पट्टाधारक मधुसूदन सिंह को एक बड़े माननीय का करीबी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सिस्टम की लापरवाही पर कड़ा प्रहार किया था। जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाना इस बात का प्रमाण है कि मौत की इन खदानों में नियमों की बलि जिला प्रशासन की नाक के नीचे दी जा रही थी।

 कब तक बचेंगे सफेदपोश?

 * मास्टरमाइंड का इतिहास: अभिषेक सिंह काके का नाम बार-बार हादसों में आना संयोग है या प्रयोग?

 * पुलिस की घेराबंदी: एसआईटी ने चार मोहरों (माइनिंग स्टाफ) को तो जेल भेज दिया, लेकिन 'वजीर' और 'बादशाह' अब भी गिरफ्त से दूर क्यों?

 * मुआवजा बनाम इंसाफ: प्रभारी मंत्री रवीन्द्र जायसवाल द्वारा घोषित 20.50 लाख का मुआवजा मरहम तो है, लेकिन असली न्याय तभी होगा जब मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।

 CO हर्ष पांडेय का कड़ा रुख:

 "जांच के दौरान पांच नए नाम सामने आए हैं जिन्हें नामजद किया गया है। एनबीडब्ल्यू के बाद अब धारा 82 की कार्रवाई चल रही है। फरार आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया (83) भी जल्द शुरू होगी। कानून से बड़ा कोई रसूखदार नहीं है।"


बेबाक 24 विशेष टिप्पणी: सोनभद्र की धरती अब और खून नहीं सहेगी। पुलिस की वर्तमान सक्रियता सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये 'बड़े नाम' वाकई सलाखों के पीछे पहुँचेंगे या फिर रसूख की आड़ में फाइलें ठंडी कर दी जाएंगी? बेबाक 24 इस मामले की हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए है।




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