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'तुर्रा का मर्द' और 'खाटी देशी' अंदाज... पिता की विरासत और हिंदुत्व की धार लेकर उभरे पीयूष राय

by on | 2026-01-11 02:23:58

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'तुर्रा का मर्द' और 'खाटी देशी' अंदाज... पिता की विरासत और हिंदुत्व की धार लेकर उभरे पीयूष राय

'बंटोगे तो कटोगे' के नारे के साथ अंसारी के गढ़ में ठोक रहे ताल, एलजी मनोज सिन्हा का भी मिलता है स्नेह

गाजीपुर (मुहम्मदाबाद): पूर्वांचल की सियासत, और खासकर गाजीपुर की फिजाओं में इन दिनों एक युवा नाम की गूंज सबसे ज्यादा है—पीयूष राय। शहीद विधायक कृष्णानंद राय और पूर्व विधायिका अलका राय के पुत्र पीयूष राय न केवल अपनी पैतृक विरासत को संभाल रहे हैं, बल्कि अपने 'खाटी देशी' अंदाज और बेबाक तेवरों से युवाओं के दिल की धड़कन बन चुके हैं।
उच्च शिक्षा, लेकिन मिट्टी से जुड़ाव
पीयूष राय की शख्सियत विरोधाभासों का एक सुंदर संगम है। एक तरफ उनके पास हाई-फाई शिक्षा और आधुनिक विजन है, तो दूसरी तरफ उनका रहन-सहन एकदम 'साफ-साफ' और जमीनी है। दिखावे से कोसों दूर, पीयूष जब अपने लोगों के बीच होते हैं, तो उनका अंदाज किसी वीआईपी नेता का नहीं, बल्कि घर के बेटे का होता है। यही वजह है कि अपनों के लिए वे जहां ढाल बनकर खड़े हैं, वहीं गैरों से और सिद्धांतों से समझौता न करने वालों से उन्होंने 'साफ दूरी' बना रखी है। न कोई लालच, न कोई समझौता—पीयूष का यह स्वभाव उन्हें भीड़ से अलग करता है।
मंच से सीएम योगी ने भी माना लोहा
मुहम्मदाबाद की एक जनसभा में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब पीयूष राय को मंच से मुहम्मदाबाद मे केवल पीयूष राय कहा तो यह केवल तारीफ नहीं, बल्कि एक मुहर थी। सीएम योगी ने उनके जुझारूपन को पहचानते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि पीयूष राय के इरादे लोहे के समान मजबूत हैं। पीयूष राय की कार्यशैली में भी सीएम योगी की छवि दिखती है—निर्णय लेने में कठोरता और 'बंटोगे तो कटोगे' के नारे के साथ हिंदुत्व के ध्वजवाहक के रूप में स्पष्ट वैचारिक लकीर। उन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति से खुद को कोसों दूर रखा है और राष्ट्रवाद की बात प्रमुखता से करते हैं।
माफिया से जंग और संवैधानिक संघर्ष
पीयूष राय का रास्ता कभी फूलों की सेज नहीं रहा। बचपन में ही पिता कृष्णानंद राय की नृशंस हत्या का दुख झेलने वाले पीयूष ने कम उम्र में ही माफियाओं से लोहा लेना सीख लिया। यह उनका जज्बा ही है कि भारी-भरकम सुरक्षा तामझाम के बजाय, वे महज एक सरकारी गनर और अपने जांबाज साथियों के भरोसे जनता के बीच निडर होकर घूमते हैं। माफिया तंत्र के खिलाफ उनकी लड़ाई सड़क पर शोर मचाने वाली नहीं, बल्कि संवैधानिक ढंग से 'आर-पार' की है। न्याय के प्रति उनकी निष्ठा और कानून के दायरे में रहकर बड़े से बड़े दुश्मन को चुनौती देना उनकी परिपक्वता को दर्शाता है।
अंसारी परिवार को सीधी चुनौती और सिन्हा का स्नेह
मुहम्मदाबाद सीट, जिसे अंसारी परिवार का अभेद्य किला माना जाता था, आज वहां पीयूष राय चुनौती बनकर खड़े हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और गाजीपुर के विकास पुरुष मनोज सिन्हा का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन पीयूष को प्राप्त है। सिन्हा के विकास मॉडल और अपनी युवा सोच के दम पर वे अंसारी परिवार को टक्कर देने पर आमादा हैं।
हर सुख-दुख में जनता के साथ
पीयूष राय की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा क्षेत्र के लोगों के बीच गुजरता है। चाहे किसी का दुख हो या खुशी, पीयूष की मौजूदगी वहां अनिवार्य होती है। जन-जन तक पहुंचने का उनका यह जज्बा और न्यायप्रिय छवि उन्हें भविष्य की राजनीति का एक चमकता सितारा बना रही है। गाजीपुर के युवाओं में उन्हें लेकर जो दीवानगी है, वह बताती है कि पीयूष राय ने पिता की शहादत को अपनी ताकत बना लिया है।



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